अब डेटा को छूकर महसूस भी कर सकेंगे! वैज्ञानिकों ने बनाया अनोखा Smart Glove
ThermoPhy Smart Glove: क्या होगा अगर किसी दिन आप किसी चार्ट या ग्राफ को सिर्फ स्क्रीन पर देखने के बजाय उसे छूकर और महसूस करके भी समझ सकें? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की तकनीक लग सकती है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने इसे हकीकत के करीब पहुंचा दिया है।
ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सिटी ऑफ एडिलेड के वैज्ञानिकों ने ThermoPhy नाम का एक खास Smart Glove तैयार किया है। यह ग्लव डिजिटल डेटा को केवल विजुअल रूप में दिखाने के बजाय उसे स्पर्श और तापमान के जरिए महसूस कराने का काम करता है। शोधकर्ताओं का मानना है कि इससे लोगों के लिए जटिल डेटा को समझना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान हो सकता है।
दिलचस्प बात यह है कि यह तकनीक डेटा को सिर्फ जानकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक अनुभव के रूप में पेश करती है। यानी यूजर डेटा को देख भी सकता है और महसूस भी कर सकता है।
उंगलियों में छिपी है खास तकनीक
ThermoPhy Glove के अंदर बेहद छोटे हीटिंग एलिमेंट लगाए गए हैं, जो उंगलियों के आसपास नियंत्रित गर्माहट पैदा करते हैं। इसी गर्माहट के जरिए यूजर को अलग-अलग तरह की जानकारी महसूस होती है।
इस तकनीक की एक और खासियत यह है कि यह एक साथ दो स्तरों पर जानकारी देती है। ग्लव का बाहरी डिजाइन सभी लोगों को दिखाई देता है, जबकि तापमान के जरिए मिलने वाला अनुभव केवल उसे पहनने वाला व्यक्ति ही महसूस कर सकता है। इससे डेटा शेयरिंग का एक नया और अधिक व्यक्तिगत तरीका सामने आता है।
चार्ट और ग्राफ को छूकर समझ सकेंगे यूजर्स
ग्लव के बाहरी हिस्से पर छोटे 3D-Printed Modules लगाए जा सकते हैं। ये मॉड्यूल बार चार्ट, लाइन ग्राफ और हीट मैप जैसे डेटा को भौतिक रूप देते हैं।
यानी यूजर सिर्फ चार्ट को देखेगा ही नहीं, बल्कि उसे हाथों से छूकर भी समझ सकेगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि Data Visualization को अधिक प्रभावी बनाने में यह तकनीक अहम भूमिका निभा सकती है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें जटिल आंकड़ों को समझने में कठिनाई होती है।
कम लागत में तैयार हुआ प्रोटोटाइप
शोधकर्ताओं के मुताबिक, इस ThermoPhy Smart Glove का शुरुआती प्रोटोटाइप काफी कम लागत में तैयार किया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसके इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की कीमत करीब 28 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर रखी गई है, जिससे भविष्य में इसे बड़े पैमाने पर विकसित करना आसान हो सकता है।
फिलहाल यह तकनीक शुरुआती चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसे Augmented Reality (AR) और दूसरी एडवांस टेक्नोलॉजी के साथ जोड़ा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो डेटा को समझने और उससे जुड़ने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।
Also Read: 6G से पहले 5.5G की होगी एंट्री! मिलेगी बिजली जैसी स्पीड, जानिए कैसा होगा एक्टिव?

