Balrampur News: पचपेड़वा में खुलेआम चल रहा फर्जी जावित्री क्लीनिक, स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

Balrampur News: जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध क्लीनिकों का मकड़जाल लगातार फैलता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्यशैली और कथित मिलीभगत के चलते, लोगों के स्वास्थ्य के साथ-खासकर छोटे बच्चों की जान के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। इसका ताजा और जीता-जागता उदाहरण पचपेड़वा स्थित नई बाजार चौराहे से स्टेशन रोड की तरफ जाने वाले मार्ग पर देखने को मिल रहा है, जहां ‘जावित्री क्लीनिक एवं फार्मेसी’ के नाम से एक संदिग्ध क्लीनिक धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। इस संदर्भ में डॉक्टर सिद्धार्थ यादव बाल रोग विशेषज्ञ से बात की गई तो उन्होंने कहा कि हम आपको कोई प्रमाण पत्र नहीं दिखा सकते या इस बारे में नहीं बता सकते हैं क्योंकि आप अथॉरिटी नहीं है।

पेड़ों पर टंगे हैं दावों के बड़े-बड़े बैनर

इस अवैध संचालन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि क्लीनिक के प्रचार के लिए मुख्य मार्ग पर पेड़ों पर बड़े-बड़े फ्लेक्स और बैनर टांगे गए हैं। इन बैनरों पर डॉ. सिद्धार्थ यादव का नाम लिखा है, जिन्हें ‘बाल रोग’ (Child Specialist) विशेषज्ञ बताया गया है। मरीजों को लुभाने के लिए बैनर पर बाकायदा यह दावा किया गया है कि वे ‘पूर्व डॉ. मालिक हॉस्पिटल, बलरामपुर’ हैं। बैनर पर यह भी लिखा है कि यहां नवजातों और विशेष रूप से बच्चों की सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज किया जाता है। संपर्क के लिए मोबाइल नंबर (7355584662) भी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया है।

पचपेड़वा में खुलेआम चल रहा फर्जी जावित्री क्लीनिक

ग्रामीण क्षेत्र के लोग बन रहे हैं शिकार

क्लीनिक के बाहर के दृश्य इस बात की गवाही दे रहे हैं कि दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों से आए सीधे-सादे लोग इन दावों के झांसे में आ रहे हैं। प्राप्त दृश्यों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि क्लीनिक के बाहर एक व्यक्ति अपनी गोद में एक छोटे बच्चे को लिए इलाज के इंतजार में बैठा है, जबकि एक महिला पास ही खड़ी है। बच्चों के इलाज जैसी संवेदनशील चिकित्सा के लिए बिना किसी पुख्ता डिग्री और वैध पंजीकरण के ऐसे क्लीनिकों का चलना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका संदिग्ध

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि पचपेड़वा नई बाजार जैसे व्यस्त चौराहे और मुख्य मार्ग (स्टेशन रोड) पर यह सब खुलेआम कैसे चल रहा है?
क्या स्वास्थ्य विभाग की नोडल टीमों और इंस्पेक्शन अधिकारियों को पेड़ों पर टंगे ये विशाल बैनर दिखाई नहीं देते?

क्या डॉ. सिद्धार्थ यादव के पास बच्चों का इलाज करने की कोई वैध मेडिकल डिग्री (MBBS/MD Pediatrics) और क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन है?

बिना किसी वैध लाइसेंस के फार्मेसी और क्लीनिक का एक साथ संचालन स्वास्थ्य महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय लोगों में यह चर्चा आम है कि विभाग की मिलीभगत या उदासीनता के बिना इतने बड़े स्तर पर अवैध क्लीनिक का संचालन संभव नहीं है।

अब देखना यह है कि इस मामले के सामने आने के बाद उच्चाधिकारी संज्ञान लेते हुए इस कथित ‘जावित्री क्लीनिक’ की जांच कराते हैं, या फिर मासूम बच्चों की जान को यूं ही झोलाछापों के रहमो-करम पर छोड़ दिया जाता है।

रिपोर्ट- योगेंद्र विश्वनाथ त्रिपाठी

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