Lucknow News: अलीगंज अग्निकांड के बाद जागा एलडीए, बिल्डिंग को गिराने का दिया आदेश
Lucknow News: राजधानी के अलीगंज में हुए भयावह अग्निकांड के ठीक अगले दिन लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। एलडीए ने उस पूरी व्यावसायिक इमारत को ध्वस्त करने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है, जिसमें संचालित हो रहे कोचिंग सेंटर में सोमवार को आग लगी थी। प्राधिकरण ने संपत्ति के स्वामियों को निर्देश दिया है कि वे इस अवैध ढांचे को स्वयं ही गिरा दें। नियत समय में ऐसा न करने की स्थिति में विकास प्राधिकरण खुद बुलडोजर चलाकर इस इमारत को ढहा देगा और इसका खर्च भी मालिकों से वसूला जाएगा। 15 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के बाद अवैध निर्माणों को लेकर जनता में उपजे भारी गुस्से के बीच यह कार्रवाई की जा रही है।
रिहायशी नक्शे पर खड़ी की कमर्शियल बिल्डिंग
आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, इस भूखंड को शुरुआत में 20 अगस्त 2014 को एक आवासीय लेआउट प्लान के तहत स्वीकृति दी गई थी, जिसमें सिर्फ 1,992 वर्ग फुट क्षेत्र पर निर्माण की अनुमति थी। हालांकि, मालिकों ने नियमों को ताक पर रखकर यहां कमर्शियल गतिविधियां शुरू कर दीं। साल 2016 में बिना अनुमति अतिरिक्त निर्माण करने के आरोप में इस बिल्डिंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था और उसी वर्ष 10 मई को ध्वस्तीकरण के आदेश भी हुए थे। उस दौरान मालिकों ने दलील दी कि उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर नहीं मिला और निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुरूप ही है, जिसके बाद 5 जुलाई 2016 को इस आदेश को टाल दिया गया था। लेकिन अब लगी भीषण आग के बाद हुई पुनरीक्षण जांच में यह अवैध पाया गया है।
सोमवार को अलीगंज की इस इमारत में स्थित कोचिंग संस्थान में जब आग भड़की, तो देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग काले और घने धुएं के गुबार से घिर गई। आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) न होने के कारण दर्जनों विद्यार्थी अंदर ही ट्रैप हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जान बचाने की जद्दोजहद में कई छात्र-छात्राओं ने ऊपरी मंजिलों से नीचे छलांग लगा दी। हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश युवाओं की उम्र 20 से 28 वर्ष के बीच थी। डॉक्टरों का मानना है कि ज्यादातर मौतें जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई हैं। इस त्रासदी ने शहर के अन्य व्यावसायिक परिसरों में सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है।
इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्च-स्तरीय जांच समिति (SIT) का गठन किया है। इस विशेष दो सदस्यीय पैनल की कमान अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात को सौंपी गई है, जबकि लखनऊ जोन के एडीजी प्रवीण कुमार को इसमें सदस्य बनाया गया है। एसआईटी को घटना के सभी पहलुओं, तकनीकी खामियों और प्रशासनिक लापरवाही की बारीकी से जांच कर आगामी 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपनी होगी।
सचिवालय और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश फायर सर्विस एक्ट की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। इस मुकदमे में चार लोगों को नामजद करने के साथ ही अन्य दोषियों को भी शामिल किया गया है। अब तक पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशोक कृष्ण जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया है। फरार अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
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