राम मंदिर चंदा विवाद को लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर कसा तंज, पूछा- बिना FIR के SIT जाँच का क्या मतलब

Lucknow News: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित हेरफेर के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत में गर्माहट बढ़ती जा रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अब दान में मिले कागभुसुंडि के गायब होने का नया मुद्दा उठाकर प्रदेश सरकार और जांच एजेंसी को कटघरे में खड़ा किया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर बुधवार को अपनी बात रखते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि बिना किसी एफआईआर के गठित की गई विशेष जांच दल (SIT) की टीम बिना तीर की कमान के जैसी है, जिसके पास कोई वास्तविक शक्ति नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित चंदा चोरी के नए-नए खुलासे सामने आने से सनातन आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं में भारी गुस्सा है।

जिस रफ्तार से हर दिन चढ़ावे और चंदे की चोरी के नए मामले उजागर हो रहे हैं, उसे देखते हुए सरकार को तत्काल नेपाल और अन्य अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को सील कर देना चाहिए ताकि इस घोटाले के आरोपी देश छोड़कर भाग न सकें। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यह एसआईटी जांच सच सामने लाने के लिए नहीं बल्कि मामले को ‘ढांकने’ (दबाने) या फिर बांट के लिए बनाई गई है।

तीन सदस्यीय एसआईटी ने शासन को सौंपी प्रारंभिक रिपोर्ट

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में राज्य सरकार ने मामले की गहराई से जांच के लिए तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष जांच समिति (SIT) का गठन किया था। इस उच्च स्तरीय दल में विजय विश्वास पंत (लखनऊ मंडलायुक्त), किरन एस (पुलिस महानिरीक्षक, लखनऊ जोन) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) शामिल हैं।

इस जांच दल ने पिछले दिनों अयोध्या का दौरा कर संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए और मंदिर के वित्तीय दस्तावेजों व बैंक अभिलेखों की बारीकी से पड़ताल की है। एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश सरकार ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि यह जांच अभी पूरी तरह बंद नहीं हुई है। जरूरत पड़ने पर आगे भी तथ्यों की जांच की जाएगी और किसी भी अंतिम फैसले पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।

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