भरत तिवारी एनकाउंटर केस बोले सीएम सम्राट, दोषी होने पर सीधे होगी कार्रवाई, अफसरों को 30 दिन की डेडलाइन

Sandesh Wahak Digital Desk: भोजपुर के बहुचर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में चौतरफा घिरी बिहार सरकार की तरफ से आखिरकार पहली बड़ी और आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को पटना में आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम के मंच से साफ किया कि भोजपुर की वारदात को सरकार ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने घोषणा की कि पीड़ित परिवार को निष्पक्ष न्याय दिलाने के लिए तत्काल प्रभाव से एक उच्च स्तरीय न्यायिक आयोग (ज्यूडिशियल कमीशन) का गठन कर दिया गया है। सीएम ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि जांच में जो भी अधिकारी या व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हमलों और सियासी गरमाहट के बीच सरकार का पक्ष रखते हुए कहा, जब भी राज्य में कोई गंभीर समस्या या विसंगति सामने आती है, हमारी सरकार तुरंत चिंतित होकर कड़े कदम उठाती है। भोजपुर एनकाउंटर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सबसे शीर्ष स्तर के न्यायिक आयोग का गठन कर दिया गया है। हम पारदर्शिता और न्याय के पक्षधर हैं, दोषियों पर कार्रवाई तय है।

31वें दिन सीधे सस्पेंड होंगे लापरवाह अफसर

संविधान हत्या दिवस के मंच से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता की समस्याओं को लटकाने वाले नौकरशाहों और अधिकारियों के खिलाफ भी एक बेहद सख्त प्रशासनिक अल्टीमेटम जारी किया। सरकार के सहयोग शिविर अभियान की प्रगति साझा करते हुए उन्होंने बताया कि अब तक करीब 3.70 लाख जन-शिकायतें मिली हैं, जिनके त्वरित निपटारे के लिए सीएमओ (CMO) स्तर से एक कड़ा जवाबदेही तंत्र लागू किया जा रहा है। अधिकारियों की सुस्ती को तोड़ने के लिए मुख्यमंत्री ने 10-20-30 दिन का यह नया मैकेनिज्म समझाया।

10 दिन: आवेदन मिलने के बाद अगर 10 दिनों में एक्शन नहीं हुआ, तो अधिकारी को मुख्यमंत्री कार्यालय से पहला नोटिस जाएगा।

20 दिन: कार्रवाई न होने पर दूसरा कड़ा नोटिस भेजा जाएगा।

25 दिन: संबंधित विभाग और अधिकारी को अंतिम चेतावनी (लास्ट वार्निंग) दी जाएगी।

31वां दिन: यदि 30 दिनों के भीतर शिकायत का निस्तारण कर आदेश जारी नहीं हुआ, तो 31वें दिन मुख्यमंत्री कार्यालय से उस अधिकारी के सीधे निलंबन (Suspension) का आदेश जारी कर दिया जाएगा।

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार का सियासी पारा पिछले कई दिनों से सातवें आसमान पर है। विपक्षी दल इस मुठभेड़ को पूरी तरह फर्जी बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। ऐसे में मुख्यमंत्री का यह बड़ा बयान और न्यायिक जांच का दांव राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें नवनिर्मित न्यायिक आयोग की जांच रिपोर्ट और लापरवाह अफसरों पर गिरने वाली गाज पर टिकी हैं।

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