Johar Trust का खेल खत्म! 494 करोड़ के हिसाब पर घिरा ट्रस्ट, अब ED करेगी अगली कार्रवाई

Rampur Johar Trust News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। आयकर विभाग द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द किए जाने के बाद अब जौहर यूनिवर्सिटी पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। जांच में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, संदिग्ध चंदे और ट्रस्ट के संचालन को लेकर कई गंभीर खुलासे हुए हैं। माना जा रहा है कि अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लिए भी जांच का रास्ता आसान हो गया है।

‘सरकार की तरह फैसले ले रहा था ट्रस्ट’

आयकर विभाग के आदेश में कहा गया है कि Johar Trust केवल एक शैक्षणिक ट्रस्ट की तरह नहीं, बल्कि एक समानांतर व्यवस्था की तरह काम कर रहा था। जांच में आरोप है कि ट्रस्ट से जुड़े फैसले पूरी तरह आजम खान और उनके परिवार के नियंत्रण में लिए जाते थे, जबकि अन्य कई ट्रस्टी केवल नाम के लिए बनाए गए थे।

जांच के दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों ने यूनिवर्सिटी भवनों के निर्माण पर करीब 46 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी थी। हालांकि विभागीय सर्वे में निर्माण लागत 450 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई। आयकर विभाग अब ट्रस्ट से करीब 494 करोड़ रुपये के धन के स्रोत का हिसाब मांगेगा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर टैक्स, ब्याज और भारी जुर्माना वसूला जा सकता है।

सरकारी योजनाओं का पैसा निर्माण में लगाने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवंटित धन का कथित तौर पर इस्तेमाल किया गया। साथ ही कई निजी निर्माण कंपनियों को सरकारी ठेके दिलाकर उनसे ट्रस्ट की संपत्तियां तैयार कराने के आरोप भी सामने आए हैं।

आयकर विभाग के मुताबिक Johar एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स जैसी फर्मों ने सरकारी अनुबंधों से मिली लगभग 86 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया और उसका समुचित लेखा-जोखा भी उपलब्ध नहीं कराया।

जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े चौधरी शहरयार सलीम ने दावा किया कि उन्हें केवल नाममात्र का ट्रस्टी बनाया गया था। उन्होंने बताया कि उन्हें एक बैठक में बुलाकर केवल दस्तखत करवाए गए और किसी भी निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। आयकर विभाग ने इसे ट्रस्ट संचालन में गंभीर अनियमितता माना है।

दान देने वालों का नहीं मिला कोई रिकॉर्ड

आयकर विभाग की जांच में कई ऐसे दानदाताओं पर भी सवाल उठे हैं, जिनसे ट्रस्ट ने करोड़ों रुपये का चंदा मिलने का दावा किया था। जांच एजेंसियों को इन दानदाताओं का कोई ठोस रिकॉर्ड या सत्यापन नहीं मिला। इनमें कई कंपनियां और निजी संस्थाएं शामिल हैं, जिनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है।

अब ED की कार्रवाई पर टिकी निगाहें

आयकर विभाग की कार्रवाई के बाद अब माना जा रहा है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी Johar University और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच तेज कर सकता है। यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप साबित होते हैं, तो यूनिवर्सिटी की संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।

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