ईरान युद्ध के बाद मोदी सरकार का बड़ा मास्टर प्लान, तेल संकट से ऐसे बचेगा भारत

India Oil Reserve Plan: ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार अब ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी का विशाल स्ट्रेटजिक रिजर्व बनाने की योजना पर काम कर रही है, ताकि किसी भी युद्ध या सप्लाई संकट की स्थिति में देश की कम से कम एक महीने की घरेलू मांग पूरी की जा सके।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने इसके लिए एक विशेष समिति भी गठित की है, जो भंडारण के स्थान, मॉडल और भूमिगत तथा ऊपर सतह वाले स्टोरेज सिस्टम का अध्ययन कर रही है। फिलहाल यह योजना शुरुआती चरण में है और इसकी आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं की गई है।

भारत की ऊर्जा निर्भरता और मौजूदा स्थिति

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान संकट के दौरान भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा था। तब देश को राशनिंग तक करनी पड़ी और जापान व दक्षिण कोरिया जैसे देशों से मदद लेनी पड़ी। वर्तमान में भारत के पास लगभग 39 मिलियन बैरल कच्चे तेल का स्ट्रेटजिक रिजर्व है, जो सिर्फ करीब 8 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है।

120 मिलियन बैरल तक बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य इस क्षमता को बढ़ाकर 120 मिलियन बैरल तक ले जाना है। यह भंडार देश के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर भूमिगत गुफाओं में तैयार किया जाएगा और अगले पांच वर्षों में पूरा होने की संभावना है। एलपीजी और एलएनजी का भंडार अभी बहुत कम है क्योंकि इन्हें स्टोर करना तकनीकी रूप से कठिन होता है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की योजना

भारत के साथ जापान एलएनजी भंडारण पर सहयोग पर भी विचार कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच इस मुद्दे पर चर्चा की संभावना है। सिंगापुर, ताइवान और पाकिस्तान भी इसी दिशा में अपने ऊर्जा सुरक्षा ढांचे को मजबूत कर रहे हैं।

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