राम मंदिर चढ़ावा चोरी: Whatspp पर होती थी चोरी के रकम की बंटवारे की बात, पुलिस ने खोले और भी राज
Ram Mandir Donation Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में पुलिस के हाथ अहम डिजिटल सबूत लगे हैं। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से ऐसी WhatsApp चैट मिली हैं, जिनमें कथित तौर पर चढ़ावे की रकम निकालने, उसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने और आपस में बांटने को लेकर बातचीत हुई थी। पुलिस इन चैट्स को जांच का मजबूत साक्ष्य मान रही है।
सूत्रों के मुताबिक, चढ़ावे की गिनती के दौरान सीधे बातचीत करना आसान नहीं होता था। ऐसे में आरोपी कथित तौर पर WhatsApp के जरिए एक-दूसरे को संदेश भेजकर पूरी योजना तय करते थे। बाद में रकम के बंटवारे को लेकर भी बातचीत चैट में दर्ज मिली है।
डिलीट चैट, फोटो और वीडियो भी मिले
जांच के दौरान कई मोबाइल फोन से WhatsApp चैट डिलीट किए जाने के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अब मोबाइलों की फोरेंसिक जांच करा रही है, ताकि हटाए गए डेटा को भी रिकवर किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, मोबाइल से कुछ फोटो और वीडियो भी मिले हैं, जिनमें आरोपी एक साथ पार्टी करते दिखाई दे रहे हैं। कुछ तस्वीरों और वीडियो में उनके पास बड़ी मात्रा में नकदी भी नजर आ रही है। पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या यह वही रकम है, जो कथित तौर पर चढ़ावे से निकाली गई थी।
SIT ने ट्रस्ट पदाधिकारियों से फिर की पूछताछ
इधर, ‘राम मंदिर चढ़ावा चोरी’ की जांच कर रही SIT एक बार फिर अयोध्या पहुंची और ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से करीब चार घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान टीम ने चढ़ावे के ऑडिट से जुड़े दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ में कई सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं मिले, जिसके बाद जांच का दायरा और बढ़ाए जाने की संभावना है।
सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान तीनों पदाधिकारी अपनी भूमिका से इनकार करते रहे और कई मामलों में जिम्मेदारी अन्य लोगों पर डालने की कोशिश की। हालांकि, एसआईटी और पुलिस दोनों ही उनके जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।
फिलहाल पुलिस की आपराधिक जांच और SIT की पड़ताल समानांतर रूप से जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

