सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को यूके से मिला अंतरराष्ट्रीय पेटेंट, प्राकृतिक कीटनाशक उपकरण के डिजाइन को मिली मान्यता
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में स्थित सिद्धार्थ विश्वविद्यालय (कपिलवस्तु) के नाम एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि दर्ज हुई है। विश्वविद्यालय के शोध और नवाचार के क्षेत्र को वैश्विक मंच पर बड़ी सफलता मिली है। यहाँ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. कपिल गुप्ता और डॉ. किरन गुप्ता द्वारा तैयार किए गए एक अभिनव शोध “Natural Pesticide Dispensing Device” (प्राकृतिक कीटनाशक वितरण उपकरण) को यूनाइटेड किंगडम इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस (UK Intellectual Property Office) द्वारा अंतरराष्ट्रीय पेटेंट (डिजाइन पंजीकरण) प्रदान किया गया है।
इस उपकरण को डिजाइन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट संख्या 6525628 के तहत पंजीकृत किया गया है। इस महत्वपूर्ण शोध कार्य में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय से संबद्ध राम रतन कॉलेज (महराजगंज) के कमलेश कुमार ने भी सह-शोधकर्ता के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई है।
क्या है इस उपकरण की खासियत और कृषि में महत्व
यह अत्याधुनिक उपकरण पूरी तरह से कृषि और पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक और जैविक कीटनाशकों (Organic Pesticides) को सुरक्षित, प्रभावी और वैज्ञानिक तरीके से खेतों में छिड़कना है। इस अंतरराष्ट्रीय डिजाइन पंजीकरण के मिलने से न केवल कृषि क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस डिवाइस के बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उत्पादन (Commercialization) का रास्ता भी साफ हो गया है। इससे किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के नुकसान से बचाने में मदद मिलेगी।

शोधार्थियों को मिलेगी उच्चस्तरीय अनुसंधान की प्रेरणा: कुलपति
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कविता शाह ने इस शानदार वैश्विक उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. किरन गुप्ता और कमलेश कुमार को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि यह सफलता विश्वविद्यालय परिसर में शोध, नवाचार और बौद्धिक संपदा अधिकारों (Intellectual Property Rights) के प्रति एक सकारात्मक संस्कृति को और मजबूत करेगी। साथ ही, यह सफलता हमारे कॉलेज के अन्य विद्यार्थियों और युवा शोधार्थियों को ग्लोबल लेवल के अनुसंधान करने के लिए प्रेरित करेगी।
विश्वविद्यालय परिवार में जश्न, वैश्विक पहचान होगी मजबूत
इस ऐतिहासिक कामयाबी पर विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता शैक्षणिक प्रो. जितेंद्र कुमार सिंह, शोध एवं विकास परिषद के अध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार श्रीवास्तव और आईक्यूएसी (IQAC) के निदेशक प्रो. सौरव सहित तमाम वरिष्ठ प्राध्यापकों व शिक्षकों ने शोधकर्ताओं को शुभकामनाएं दीं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भरोसा जताया कि इस तरह की अंतरराष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की वैश्विक साख को और बुलंद करेंगी तथा बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में नए प्रतिमान स्थापित करेंगी। विश्वविद्यालय के सूचना एवं संपर्क अधिकारी डॉ. अविनाश प्रताप सिंह ने आधिकारिक तौर पर इस गौरवपूर्ण उपलब्धि की जानकारी मीडिया से साझा की।
रिपोर्ट- जाकिर खान
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