UP में देश का पहला लैक्टेशन मैनेजमेंट ट्रेनिंग मॉड्यूल लॉन्च, नवजातों को मिलेगा बड़ा फायदा
Lucknow News: उत्तर प्रदेश (UP) ने मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य ने देश का पहला ‘फैसिलिटी-बेस्ड लैक्टेशन मैनेजमेंट ट्रेनिंग मॉड्यूल’ लॉन्च कर नई मिसाल कायम की है। इस पहल का उद्देश्य अस्पतालों में स्तनपान प्रबंधन को वैज्ञानिक और प्रभावी बनाना है, ताकि नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद बेहतर पोषण मिल सके और माताओं को सही परामर्श उपलब्ध कराया जा सके।
इस प्रशिक्षण मॉड्यूल का शुभारंभ 4 जुलाई को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने किया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत परिवार कल्याण निदेशालय द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स कार्यक्रम में हुआ। इस पहल को UNICEF और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU), लखनऊ का तकनीकी सहयोग मिला।
विशेषज्ञों ने तैयार किया वैज्ञानिक प्रशिक्षण मॉड्यूल
इस मॉड्यूल के विकास में एसजीपीजीआई के नियोनेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. अनीता सिंह ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने मॉड्यूल के वैज्ञानिक लेखन, तकनीकी विकास और साक्ष्य-आधारित प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह मॉड्यूल प्रो. एस.एन. सिंह, प्रो. शालिनी त्रिपाठी, प्रो. अनीता सिंह और प्रो. प्रतिमा आनंद के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को स्तनपान प्रबंधन के वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं का प्रशिक्षण देना है।
29 जून से 4 जुलाई 2026 तक चले छह दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश की 45 लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट्स (LMU) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यहां तैयार किए गए मास्टर ट्रेनर्स अब अपने-अपने जिलों और स्वास्थ्य संस्थानों में अन्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे पूरे प्रदेश में स्तनपान प्रबंधन की एक समान और वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित हो सके।
मां और नवजात दोनों को होगा सीधा लाभ

इस प्रशिक्षण मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य जन्म के तुरंत बाद स्तनपान को बढ़ावा देना, माताओं को सही परामर्श देना, स्तनपान से जुड़ी सामान्य समस्याओं का समाधान करना और शिशुओं में फॉर्मूला दूध पर अनावश्यक निर्भरता कम करना है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में स्तनपान की दर बढ़ेगी, नवजात एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की यह पहल भविष्य में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श मॉडल साबित हो सकती है।
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