चिराग पासवान ने विपक्ष को चेताया, बोले- राम के नाम पर न हो सियासत, आस्था से खिलवाड़ करने वालों को मिलेगी कड़ी सजा
Lucknow News: लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को राजधानी लखनऊ में विपक्ष पर जमकर राजनीतिक तीर चलाए। मीडिया से बातचीत के दौरान अयोध्या राम मंदिर दान विवाद पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए चिराग ने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर किसी भी तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि श्रीराम भक्तों की अटूट आस्था को ठेस पहुंचाने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले पर उन्होंने कहा कि एसआईटी (SIT) गहराई से जांच कर रही है और कई गिरफ्तारियां भी हुई हैं। इसके साथ ही उन्होंने भरत तिवारी कांड के दोषियों को भी कठोरतम सजा देने की वकालत की।
संविधान और आरक्षण के नाम पर भ्रम फैला रही है कांग्रेस-सपा
इससे पहले, चिराग पासवान लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान पहुंचे, जहाँ लोजपा के संस्थापक व पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत रामविलास पासवान की जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया था। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए चिराग ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में इन पार्टियों ने आरक्षण और संविधान खतरे में है का झूठा डर दिखाकर जनता को गुमराह किया। चिराग ने कहा, जो लोग संसद में हाथ में संविधान लेकर लोकसभा को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं, उन्होंने हमेशा बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर और उनके बनाए संविधान का अपमान किया है।
कांग्रेस ने तीन दशक तक संसद में नहीं लगने दी बाबा साहेब की तस्वीर
विपक्ष को घेरते हुए लोजपा प्रमुख ने इतिहास की याद दिलाई और कहा कि कांग्रेस ने आजादी के तीन दशक बाद तक भी संसद भवन में बाबा साहेब की तस्वीर नहीं लगने दी थी। उन्होंने भावुक होते हुए कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया, मैं आप सभी को यह विश्वास दिलाता हूं कि जब तक चिराग पासवान जीवित है, देश में न तो आरक्षण को कोई खतरा हो सकता है और न ही संविधान को। उन्होंने कहा कि समाज को जाति-पाति और मजहब के दायरे से ऊपर उठकर विकास की राह पर ले जाना होगा।
रामविलास पासवान ने तय की थी दलितों के हक की लड़ाई
चिराग ने अपने पिता स्व. रामविलास पासवान के योगदान को याद करते हुए कहा कि बाबा साहेब आंबेडकर को भारत रत्न से सम्मानित कराने और संसद के सेंट्रल हॉल में उनका तैलचित्र लगवाने में उनके पिता की सबसे निर्णायक भूमिका थी। दलित समाज के उत्थान और देश में आरक्षण की मांग को सबसे पहले मुखर करने वाले नेता रामविलास पासवान ही थे। उन्होंने अंत में कहा कि कांग्रेस और सपा ने हमेशा ‘बांटो और राज करो’ की नीति अपनाई है, और अब वक्त आ गया है कि जनता के सामने ऐसे दलों की जवाबदेही तय की जाए।
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