प्राकृतिक आपदा में घर तबाह हुआ तो किरायेदार को नहीं देना होगा किराया, जानें रेंट के नियम
Tenant Rights India: बाढ़, भूकंप, तूफान या आग जैसी प्राकृतिक आपदाएं केवल मकान मालिक ही नहीं, बल्कि किराये पर रहने वाले लोगों के लिए भी बड़ी परेशानी खड़ी कर देती हैं। ऐसे समय में सबसे बड़ा सवाल होता है कि क्या किराया देना होगा, मकान की मरम्मत कौन कराएगा, सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस मिलेगा या नहीं और क्या रेंट एग्रीमेंट तुरंत खत्म किया जा सकता है। इन सवालों के जवाब ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 और मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 में दिए गए हैं।
कब खत्म हो सकता है रेंट एग्रीमेंट
ट्रांसफर ऑफ प्रॉपर्टी एक्ट, 1882 की धारा 108(B)(e) के अनुसार, यदि आग, बाढ़, तूफान, भीड़ की हिंसा या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से किराये का मकान पूरी तरह या बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त होकर रहने लायक नहीं रहता और नुकसान किरायेदार की गलती से नहीं हुआ है, तो किरायेदार अपनी इच्छा से लीज समाप्त कर सकता है।
हालांकि, रेंट एग्रीमेंट अपने आप खत्म नहीं होता। यदि किरायेदार उसी मकान में रहना जारी रखता है तो उसे तय नियमों के अनुसार किराया देना होगा। मामूली या मरम्मत योग्य नुकसान की स्थिति में यह प्रावधान लागू नहीं होता।
मॉडल टेनेंसी एक्ट में मिली अतिरिक्त राहत
मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और असम सहित कई राज्यों में लागू है। इसकी धारा 15(6) के तहत, यदि प्राकृतिक आपदा के कारण मकान रहने योग्य नहीं रहता, तो मकान मालिक तब तक किराया नहीं ले सकता जब तक मरम्मत कर उसे दोबारा रहने लायक न बना दे।
अगर मकान की मरम्मत संभव नहीं है या मकान मालिक ऐसा नहीं करा पाता, तो नोटिस अवधि खत्म होने के 15 दिनों के भीतर किरायेदार का पूरा सिक्योरिटी डिपॉजिट और एडवांस किराया लौटाना होगा। हालांकि, किसी कानूनी बकाया या देनदारी की राशि इसमें से समायोजित की जा सकती है।
धारा 5(3) के अनुसार, यदि आपदा के दौरान तय अवधि वाला रेंट एग्रीमेंट समाप्त हो जाए, तो किरायेदार के अनुरोध पर मकान मालिक को आपदा खत्म होने के बाद एक महीने तक उसी शर्तों पर रहने की अनुमति देनी होगी। वहीं, आपातकालीन स्थिति में मकान मालिक मरम्मत के लिए बिना 24 घंटे का नोटिस दिए भी घर में प्रवेश कर सकता है।

