Lucknow: बुजुर्ग दंपती को 18 दिनों तक रखा डिजिटल अरेस्ट, ATS-CBI का खौफ दिखाकर ठगे 42 लाख

Lucknow Cyber Crime: साइबर ठगों ने लखनऊ के लालबाग में एक 70 वर्षीय रिटायर्ड FCI कर्मचारी और उनकी पत्नी को करीब 18 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) रखकर 42.09 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने खुद को ATS, NIA और CBI का अधिकारी बताकर दंपती को पुलवामा आतंकी हमले और मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी।

ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी रखी और दंपती से बैंक खाते, एफडी, पोस्ट ऑफिस में जमा रकम और पत्नी के गहनों तक की जानकारी हासिल कर ली। बाद में अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।

23 जुलाई को आई पहली कॉल, फिर शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’

Lucknow के पीड़ित अंसार जमाल अब्बासी के व्हाट्सऐप पर 23 जुलाई को दोपहर करीब 1:32 बजे कॉल आई। ठगों ने दावा किया कि पुलवामा हमले से जुड़े मामले की जांच में मनीष गोयल नाम के व्यक्ति का नाम सामने आया है और उसके पास पीड़ित के नाम से जारी सिम, ICICI बैंक का ATM कार्ड और बैंक स्टेटमेंट मिला है।

बुजुर्ग और दिव्यांग होने का हवाला देकर ठगों ने कहा कि उन्हें गिरफ्तार करने के बजाय घर में ही हाउस अरेस्ट (House Arrest) किया जा रहा है। दंपती को मोबाइल की वीडियो कॉल 24 घंटे चालू रखने का निर्देश दिया गया। साथ ही किसी रिश्तेदार को जानकारी देने पर गिरफ्तारी और सात साल की सजा की धमकी दी गई।

CBI और जज से बात कराने का भी नाटक

ठगों ने उसी रात बैंक खातों, एफडी, पोस्ट ऑफिस की जमा रकम और पत्नी के जेवरों की जानकारी जुटा ली। इसके कुछ देर बाद दूसरे नंबर से कॉल कर खुद को पुणे ATS का अधिकारी बताया गया।

24 जुलाई को आरोपियों ने CBI अधिकारी और हाईकोर्ट के जज से बातचीत कराने का दावा करते हुए वीडियो कॉल कराई। दंपती को भरोसा दिलाया गया कि इस प्रक्रिया के बाद उनका केस और जमानत का मामला निपटा दिया जाएगा।

इसके बाद अलग-अलग तारीखों में RTGS के जरिए रकम ट्रांसफर कराई जाती रही। करीब 18 दिनों में छह अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 42,09,869 रुपये आरोपियों के बताए खातों में भेज दिए गए।

ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने साइबर क्राइम (Cyber Crime) थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मामले में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और रकम के ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।

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