UP के 2,005 स्कूलों में बिजली ठप, 1,314 में शौचालय बेकार, क्या इसीलिए यूट्यूबर्स पर लगी रोक?
UP Government Schools Facility: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अब बिना अनुमति यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया से जुड़े लोगों और अन्य बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। अयोध्या, आजमगढ़ समेत कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसर में बिना अनुमति फोटो और वीडियो बनाने पर भी पाबंदी लगाई है।
इस फैसले के पीछे विभाग ने बच्चों की सुरक्षा, निजता और पढ़ाई में व्यवधान जैसी वजहें बताई हैं। हालांकि, इस फैसले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर कोई पत्रकार या डिजिटल क्रिएटर सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति दिखाना चाहे तो वह कैसे करेगा?
UP के Government Schools की जमीनी तस्वीर क्या है?
UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में कुल 2,65,278 स्कूल हैं, जिनमें 1,37,103 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति देखें तो तस्वीर पूरी तरह एक जैसी नहीं है।
- बिजली: 1,30,146 सरकारी स्कूलों में बिजली की सुविधा दर्ज है, जबकि 6,957 स्कूलों में बिजली नहीं है। वहीं करीब 2,005 स्कूल ऐसे हैं जहां बिजली मौजूद है, लेकिन वह कार्यात्मक नहीं है।
- शौचालय: 1,37,077 स्कूलों में शौचालय की सुविधा दर्ज है। लेकिन इनमें से करीब 1,314 स्कूलों में शौचालय कार्यात्मक नहीं हैं।
- हैंडवॉश: 1,35,533 स्कूलों में हैंडवॉश की सुविधा है, जबकि 1,570 सरकारी स्कूलों में यह सुविधा दर्ज नहीं है।
यानी सिर्फ सुविधा का मौजूद होना ही काफी नहीं है, उसका इस्तेमाल करने लायक होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
सरकार ने यूट्यूबर्स पर रोक की वजह क्या बताई?

बेसिक शिक्षा विभाग का तर्क है कि UP Government के Schools में बिना अनुमति बाहरी लोगों की आवाजाही से बच्चों की सुरक्षा और निजता प्रभावित हो सकती है। खासकर नाबालिग बच्चों की फोटो या वीडियो बनाने से पहले अनुमति जरूरी मानी गई है।
इसके अलावा अधिकारियों का कहना है कि लगातार वीडियो शूटिंग, इंटरव्यू और सोशल मीडिया कंटेंट बनाने से स्कूल का शैक्षणिक माहौल और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर बिना अनुमति प्रवेश और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरी तरफ डिजिटल पत्रकारों, यूट्यूबर्स और विपक्षी दलों का तर्क है कि सरकारी स्कूलों में बिजली, शौचालय, पानी, मिड-डे मील और शिक्षकों की मौजूदगी जैसी सुविधाएं सार्वजनिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
अगर इनकी जमीनी स्थिति की रिपोर्टिंग पर रोक लगती है तो School Education Accountability और पारदर्शिता का सवाल खड़ा हो सकता है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए नियंत्रित प्रवेश जरूरी हो सकता है, लेकिन पूरी तरह बाहरी निगरानी रोक देना अलग बात है।
अब सरकार के सामने असली चुनौती क्या?
सबसे बड़ा सवाल अनुमति की व्यवस्था को लेकर है। अगर किसी पत्रकार या यूट्यूबर को UP के Government Schools की स्थिति की रिपोर्टिंग करनी है तो उसे किस अधिकारी से अनुमति मिलेगी, कितने समय में मिलेगी और क्या सभी के लिए समान नियम होंगे?
सरकार के सामने बच्चों की निजता और सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ सरकारी स्कूलों की जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की चुनौती भी है। ऐसे में जरूरत ऐसी व्यवस्था की है, जिसमें बच्चों की सुरक्षा भी बनी रहे और स्कूलों की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र व जिम्मेदार रिपोर्टिंग भी संभव हो।
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