Jaunpur News: हत्या में सजायाफ्ता शिक्षक पर फर्जी तरीके से पद पर बने रहने का आरोप, उच्चस्तरीय जांच की मांग
Jaunpur News: उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मड़ियाहूं तहसील अंतर्गत आरएस इंटर कॉलेज ककराही से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जौनपुर निवासी राजेश कुमार तिवारी ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि कॉलेज में कार्यरत सहायक अध्यापक दिनेश प्रताप सिंह नियमों को ताक पर रखकर पद पर बने हुए हैं। शिकायत के अनुसार, वर्ष 1987 में सहायक अध्यापक रविनाथ सिंह की मृत्यु के बाद दिनेश प्रताप सिंह को 16 अक्टूबर 1992 को मृतक आश्रित कोटे के तहत सहायक लिपिक बनाया गया था।
आरोप है कि बाद में धनबल और प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्होंने 23 जुलाई 2003 को दोबारा इसी कोटे से सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति हासिल कर ली। इसके अलावा, 2004 के हत्या कांड में जौनपुर कोर्ट द्वारा 15 अप्रैल 2011 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी, जबकि 17 अक्टूबर 2024 को गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में भी सजा सुनाकर जेल भेजा गया था।
उच्च न्यायालय से जमानत पर बाहर, नियमों को दरकिनार कर बने प्रभारी प्रधानाचार्य
शिकायतकर्ता का कहना है कि उच्च न्यायालय से केवल जमानत मिलने के आधार पर कोई व्यक्ति सरकारी सेवा में कैसे बना रह सकता है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। नियुक्ति में विभागीय स्तर पर गंभीर घपलेबाजी के आरोप लगाते हुए बताया गया कि वर्तमान प्रबंधक की जांच में भी दिनेश प्रताप सिंह की नियुक्ति फर्जी पाई गई थी, जिसकी फाइल 25 नवंबर 2025 को माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजी जा चुकी है। इसके बावजूद, वे न केवल नियमित वेतन उठा रहे हैं, बल्कि वरिष्ठता सूची में 12वें स्थान पर होने के बाद भी नियमों को दरकिनार कर उन्हें कार्यवाहक/प्रभारी प्रधानाचार्य का प्रभार सौंप दिया गया है। जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) और शिक्षा विभाग के नोटिसों का भी कॉलेज प्रशासन कोई जवाब नहीं दे रहा है।
अनुचित वेतन वसूली और सख्त कार्रवाई की मांग
इस पूरे मामले में आर्यावर्त आर्य त्रिदंडी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी और मानवाधिकार परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव ने शिकायतकर्ता का पूर्ण समर्थन किया है। उन्होंने सरकार और शिक्षा विभाग से त्वरित व निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में ढिलाई से जनता का व्यवस्था पर से विश्वास उठ जाएगा। शिकायतकर्ता राजेश कुमार तिवारी ने साक्ष्यों के साथ सक्षम अधिकारियों से अपील की है कि प्रकरण की समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए और फर्जी तरीके से उठाए गए सरकारी वेतन की ब्याज सहित शत-प्रतिशत वसूली की जाए।
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