फास्ट ट्रैक कोर्ट में भी तारीख पर तारीख? UP में 78% लंबित मामले, 13.74 लाख केस अटके

UP Fast Track Courts Pending Cases: देशभर में फास्ट ट्रैक अदालतों का मकसद मामलों की जल्द सुनवाई और त्वरित निस्तारण करना है, लेकिन लंबित मामलों के आंकड़े तस्वीर कुछ अलग दिखा रहे हैं। उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में ही फास्ट ट्रैक अदालतों के 13.74 लाख से ज्यादा मामले निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं।

आरटीआई (RTI) के तहत सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, 30 जून 2026 तक देश की फास्ट ट्रैक अदालतों में 17.5 लाख से अधिक मामले लंबित थे। इनमें अकेले यूपी के मामलों की हिस्सेदारी करीब 78 प्रतिशत है। यह जानकारी न्याय विभाग (Department of Justice) ने नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता अमित गुप्ता द्वारा मांगी गई आरटीआई के जवाब में दी है।

UP में 373 Fast Track Courts, 13.74 लाख केस लंबित

न्याय विभाग के अनुसार, 30 जून 2026 तक देश के 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 884 फास्ट ट्रैक अदालतें काम कर रही थीं। इनमें सबसे ज्यादा लंबित मामलों वाला राज्य उत्तर प्रदेश है।

यूपी में 373 फास्ट ट्रैक अदालतों में 13.74 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं। देशभर में लंबित मामलों की तुलना करें तो यह संख्या कुल लंबित मामलों का करीब 78 प्रतिशत बैठती है।

लंबित मामलों के मामले में महाराष्ट्र (Maharashtra) दूसरे नंबर पर है। यहां 117 Fast Track Courts में करीब 1.35 लाख मामले लंबित हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 93,245, तमिलनाडु में 89,703 और असम में 17,145 मामले लंबित पाए गए।

सिक्किम में सबसे कम मामले, कई राज्यों में कोर्ट ही नहीं

आंकड़ों के मुताबिक सिक्किम (Sikkim) में लंबित मामलों की संख्या सबसे कम है। वहां दो फास्ट ट्रैक अदालतों में सिर्फ 18 मामले लंबित पाए गए।

वहीं, कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक भी फास्ट ट्रैक अदालत संचालित नहीं हो रही है। इनमें बिहार, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड शामिल हैं।

Fast Track Courts राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से संबंधित हाई कोर्ट से सलाह-मशविरा करके खास तरह के मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए बनाई जाती हैं। न्याय विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन अदालतों की स्थापना के लिए राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से कोई केंद्रीय वित्तीय सहायता नहीं दी जा रही है।

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