UP में 12 साल बाद होगा ‘वेज बोर्ड’ का गठन, योगी सरकार का बड़ा एलान, जानें किसे मिलेगा फायदा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों मजदूरों और कर्मचारियों के हक में एक बडा फैसला लिया है। हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक नाराजगी और हाईपावर कमेटी की सिफारिशों के बाद सरकार ने मई 2026 में नए ‘वेज बोर्ड’ (Wage Board) के गठन का एलान किया है। 2014 के बाद यह पहली बार है जब प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी की मूल दरों का नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा।
क्यों खास है वेज बोर्ड का गठन?
न्यूनतम मजदूरी के निर्धारण में वेज बोर्ड की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। बोर्ड का गठन न होने के कारण 2014 से अब तक श्रमिकों के केवल महंगाई भत्ते (DA) में ही बढ़ोतरी हो रही थी, जबकि मूल वेतन स्थिर था। अब मई में बोर्ड के गठन के बाद, श्रमिकों के न्यूनतम वेतन की मूल दरों (Basic Pay) को वर्तमान महंगाई और जरूरतों के हिसाब से फिर से तय किया जाएगा। अब तक प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी और महंगाई भत्ते की दरें एकसमान थीं, लेकिन वेज बोर्ड के आने के बाद श्रेणियों के आधार पर इसमें बदलाव होगा।
हर पांच साल में वेज बोर्ड का गठन होना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश में पिछली बार 28 जनवरी 2014 को बोर्ड की संस्तुति पर अधिसूचना जारी हुई थी। किन्हीं कारणों से पिछले 12 वर्षों से इस पर काम नहीं हो सका। अब योगी सरकार ने नए ‘वेज कोड’ को ध्यान में रखते हुए इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
मंत्री अनिल राजभर: “नोएडा का बवाल एक साजिश”
श्रम और सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने इस फैसले की जानकारी देते हुए विपक्ष और ‘आंदोलन जीवियों’ पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नोएडा की फैक्ट्रियों में हुआ बवाल साजिशन कराया गया है ताकि प्रदेश के औद्योगिक विकास को रोका जा सके। मंत्री ने मजदूरों से अपील की कि वे किसी की कठपुतली न बनें। उन्होंने कानपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि कैसे आंदोलनों की वजह से वहां के उद्योग बंद हो गए। सरकार वेज बोर्ड का गठन 2-3 महीने पहले ही करना चाहती थी, लेकिन केंद्र सरकार द्वारा ‘फ्लोर वेज’ जारी होने के इंतजार में इसे अब मई में लागू किया जा रहा है।
Also Read: सम्राट चौधरी आज रचेंगे इतिहास, पहली बार बिहार में BJP का मुख्यमंत्री, पटना में जश्न का माहौल

