अडानी पावर की एक और मेगा डील, जेपी पावर में खरीदेगी 24% हिस्सेदारी
Sandesh Wahak Digital Desk: भारतीय ऊर्जा क्षेत्र (पावर सेक्टर) में अपना दबदबा और मजबूत करते हुए अडानी ग्रुप ने एक और बड़ा रणनीतिक सौदा किया है। अडानी पावर ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर एलान किया कि उसने जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेपी एसोसिएट्स) के साथ निश्चित समझौतों (डेफिनिटिव एग्रीमेंट्स) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
इस डील के तहत अडानी पावर, जयप्रकाश पावर वेंचर्स लिमिटेड (जेपी पावर) में 24 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करेगी। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में स्थित 180 मेगावाट क्षमता वाले ‘चुर्क थर्मल पावर प्लांट’ का मालिकाना हक भी अडानी पावर के पास आ जाएगा। यह पूरा समझौता एनसीएलटी द्वारा मंजूर किए गए रेजॉलूशन प्लान के तहत किया गया है।
इस बड़ी डील की खबर आते ही शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों में रौनक लौट आई। गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में जेपी पावर का शेयर 3 फीसदी से अधिक की बढ़त के साथ 19.08 रुपये पर पहुंच गया। वहीं, अडानी पावर के शेयरों में भी निवेशकों ने अच्छी खरीदारी की, जिससे कंपनी का शेयर 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी लेकर 225.60 रुपये पर बंद हुआ।
प्रयागराज पावर में भी एंट्री
सौदा नकद (कैश) भुगतान के जरिए पूरा किया जाएगा। अडानी पावर ने शेयर परचेज एग्रीमेंट के तहत जेपी पावर में 24% हिस्सेदारी खरीदने के लिए करीब 2993.6 करोड़ रुपये की डील की है। इसके अतिरिक्त, एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट के जरिए चुर्क थर्मल पावर प्लांट और उससे जुड़ी तमाम संपत्तियां अडानी के पोर्टफोलियो का हिस्सा बनेंगी। इतना ही नहीं, अडानी ग्रुप प्रयागराज पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड में जेपी एसोसिएट्स की 11.49 फीसदी हिस्सेदारी को भी 1,200 करोड़ रुपये में खरीदने जा रहा है।
इस अधिग्रहण से अडानी पावर का पावर जेनरेशन पोर्टफोलियो काफी मजबूत होगा। जेपी पावर के पास फिलहाल थर्मल और हाइड्रो पावर को मिलाकर कुल 2220 मेगावाट की उत्पादन क्षमता है। इसके साथ ही कंपनी कोयला खनन, सैंड माइनिंग और सीमेंट ग्राइडिंग के कारोबार में भी सक्रिय है। जेपी पावर का टर्नओवर वित्त वर्ष 2025 में 57,063 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने जयप्रकाश एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप की 14,535 करोड़ रुपये की समाधान योजना को मंजूरी दी थी, जिसे कर्जदाताओं (लेंडर्स) ने वेदांता की ऊंची बोली के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित मानते हुए तरजीह दी थी।
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