बैठक के दौरान आपस में भिड़े आशु मलिक और इमरान मसूद, बगल में बैठीं इकरा हसन हुईं असहज

Saharanpur News: सहारनपुर में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के दौरान विपक्षी गठबंधन इंडिया के दो प्रमुख घटकों समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच जारी अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ही सपा विधायक आशु मलिक और कांग्रेस सांसद इमरान मसूद आपस में भिड़ गए। दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी नोकझोंक से माहौल गरमा गया, वहीं बगल में बैठीं कैराना से सपा सांसद इकरा हसन पूरी घटना के दौरान असहज और हतप्रभ नजर आईं। दो सहयोगी दलों के नेताओं के बीच हुए इस विवाद का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

सवाल पूछने की प्रक्रिया पर हुआ विवाद

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब सपा विधायक आशु मलिक जनता से जुड़ी समस्याओं और विकास कार्यों पर अनुपूरक सवाल उठाने लगे। बैठक की अध्यक्षता कर रहे कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि विधायक दूसरों को बोलने का मौका नहीं दे रहे हैं। जब मलिक ने कहा कि वह अधिकारियों के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं और जनता के मुद्दों को उठाना उनका अधिकार है, तो मसूद ने उन्हें टोकते हुए कहा कि बात रखने के लिए चेयर (अध्यक्ष) की अनुमति लेना अनिवार्य है।

इस पर पलटवार करते हुए आशु मलिक ने कहा कि यह कोई आधिकारिक रैली नहीं, बल्कि एक समीक्षा बैठक है। इस जवाब से नाराज इमरान मसूद ने सख्त लहजे में कहा कि बैठक नियमों के अनुसार ही चलेगी और किसी को भी बिना अनुमति बोलने की इजाजत नहीं होगी। इस दौरान दोनों नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर तीखे तंज भी कसे गए।

आशु मलिक ने दी सफाई

मामले पर अपना पक्ष रखते हुए विधायक आशु मलिक ने बताया कि विवाद मुख्य रूप से अनुपूरक सवाल पूछने के अधिकार को लेकर हुआ था। उन्होंने कहा कि वह कैंसर जांच और खाताखेड़ी सड़क निर्माण जैसी गंभीर समस्याओं पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि केवल सड़क बना देना खाताखेड़ी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं है, क्योंकि नगर निगम वहां के लोगों से कमर्शियल टैक्स वसूल रहा है। मलिक के अनुसार, खाताखेड़ी जैसे इलाकों की अनदेखी करके सहारनपुर में स्मार्ट सिटी की कल्पना करना बेमानी है।

गौरतलब है कि गठबंधन में शामिल होने के बावजूद सहारनपुर में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेताओं के रिश्ते अक्सर तल्ख रहे हैं। इमरान मसूद द्वारा अपनी ही सहयोगी पार्टी के खिलाफ दिए जाने वाले बयानों से सपा नेतृत्व कई बार असहज स्थिति में पड़ता रहा है।

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