बड़ा फैसला: E100 Fuel को मिली हरी झंडी, गडकरी बोले- जल्द सड़कों पर दौड़ेंगी फ्लेक्सी फ्यूल कारें

E100 Fuel in India: भारत के ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 100 प्रतिशत इथेनॉल आधारित ईंधन यानी (E100 Fuel) को कानूनी मंजूरी देने वाले नियमों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस फैसले के साथ ही देश में पूरी तरह इथेनॉल पर चलने वाले फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का रास्ता साफ हो गया है।

नागपुर में आयोजित शुगर, इथेनॉल और बायो-एनर्जी इंडिया कॉन्फ्रेंस में गडकरी ने कहा कि सरकार अब सिर्फ E20 कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वैकल्पिक ईंधन को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हाल ही में E85 फ्यूल लॉन्च होने के बाद (E100 Fuel) को मिली मंजूरी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ऑटो कंपनियां भी इस बदलाव के लिए तेजी से तैयारी कर रही हैं। मारुति सुजुकी अपनी फ्लेक्स-फ्यूल WagonR और हीरो मोटोकॉर्प इथेनॉल आधारित मोटरसाइकिल पहले ही प्रदर्शित कर चुकी हैं। गडकरी के मुताबिक अगले डेढ़ से दो महीने के भीतर टोयोटा, सुजुकी, हुंडई और एमजी जैसी कंपनियां भारतीय बाजार में E100आधारित नए वाहन उतार सकती हैं।

E100 Fuel के लिए चाहिए अलग तकनीक

विशेषज्ञों के अनुसार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में सामान्य पेट्रोल इंजन की तुलना में अलग तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें विशेष कैलिब्रेशन, फ्यूल लाइन और ऐसे पार्ट्स लगाए जाते हैं जो उच्च इथेनॉल मिश्रण को आसानी से संभाल सकें।

हालांकि E100 को लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि मौजूदा पेट्रोल या E20 गाड़ियों में इस ईंधन का उपयोग नहीं किया जा सकता। इसके लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ही खरीदनी होंगी।

इसके अलावा इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में ऊर्जा घनत्व कम होता है, जिसके कारण समान दूरी तय करने के लिए ईंधन की खपत थोड़ी अधिक हो सकती है। वहीं देशभर में E100 उपलब्ध कराने के लिए पेट्रोल पंपों पर अलग डिस्पेंसर और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर भी विकसित करना होगा।

किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को होगा फायदा

सरकार का मानना है कि (E100 Fuel) को बढ़ावा मिलने से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी। साथ ही गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाले इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को भी सीधा लाभ मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वाहन निर्माता कंपनियां तेजी से फ्लेक्स-फ्यूल वाहन बाजार में उतारती हैं और ईंधन वितरण नेटवर्क विकसित होता है, तो आने वाले वर्षों में इथेनॉल आधारित वाहन भारत के परिवहन क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

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