ISI मार्क के नाम पर ठगी, गाजियाबाद में BIS का बड़ा एक्शन, 730 हेलमेट और 1,158 LPG रेगुलेटर जब्त
BIS Raid Ghaziabad: गाजियाबाद में ISI Mark के दुरुपयोग के खिलाफ भारतीय मानक ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई की है। BIS के गाजियाबाद शाखा कार्यालय ने एक ही दिन दो अलग-अलग स्थानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। कार्रवाई लोनी की हेलमेट निर्माण इकाई और मोहन नगर की एक औद्योगिक इकाई में की गई।
दोनों जगहों से करीब 730 हेलमेट, 4,646 हेलमेट पैकेजिंग सामग्री और 1,158 LPG रेगुलेटर जब्त किए गए। पैकेजिंग सामग्री पर रद्द किए जा चुके BIS लाइसेंस नंबर अंकित थे। यह कार्रवाई BIS Act, 2016 की धारा 28 के तहत की गई।
लोनी में 730 हेलमेट और पैकेजिंग सामग्री जब्त
BIS की पहली टीम ने शैलेंद्र कुमार वर्मा, वैज्ञानिक-C एवं उप निदेशक, GZBO और हर्षित कुमार जैन, वैज्ञानिक-C एवं उप निदेशक, NOBO के नेतृत्व में लोनी स्थित हेलमेट निर्माण इकाई की तलाशी ली।
यहां 730 हेलमेट और 4,646 पैकेजिंग सामग्री मिलीं, जिन पर रद्द BIS लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल किया गया था। शुरुआती जांच में रद्द लाइसेंस के बावजूद ISI मार्क वाले हेलमेट के निर्माण या भंडारण से जुड़ा मामला सामने आया।
मोहन नगर में 1,158 LPG रेगुलेटर मिले
दूसरी कार्रवाई आनंद इंडस्ट्रियल एस्टेट, मोहन नगर की एक इकाई में हुई। राजेंद्र कुमार पालसानिया, वैज्ञानिक-D/संयुक्त निदेशक, GZBO और सचिन सिंह नरूका, वैज्ञानिक-C/उप निदेशक, DLBO के नेतृत्व में टीम ने तलाशी ली।
इस दौरान 1,158 LPG रेगुलेटर जब्त किए गए। BIS के मुताबिक, कार्रवाई BIS Act, 2016 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में की गई है। सभी जब्त उत्पादों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए BIS के कब्जे में लिया गया है।
BIS ने उपभोक्ताओं से की ये अपील
GZBO के वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख जी. भवानी ने कहा कि संबंधित फर्मों के खिलाफ BIS Act, 2016 के तहत जरूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिनियम की धारा 29 के तहत पहली बार उल्लंघन पर दो साल तक की सजा या कम से कम 2 लाख रुपये का जुर्माना, जो संबंधित माल की कीमत के 10 गुना तक बढ़ सकता है, या दोनों का प्रावधान है।
BIS ने लोगों से अपील की है कि ISI मार्क वाला सामान खरीदने से पहले उसकी प्रमाणिकता और लाइसेंस की जानकारी BIS CARE App पर जरूर जांचें। ISI मार्क के गलत इस्तेमाल का संदेह होने पर BIS CARE App या gzbo@bis.gov.in पर शिकायत की जा सकती है। BIS के अनुसार शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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