IPL 2026: रिप्लेसमेंट नियम में बदलाव, जानिए कैसे चुनेंगी टीमें नए खिलाड़ी
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Sandesh Wahak Digital Desk: इंडियन प्रीमियर लीग के 19वें सीजन (IPL 2026) के शुरू होने से पहले ही कई खिलाड़ी अलग-अलग कारणों से टूर्नामेंट से बाहर हो चुके हैं।
चोट, फिटनेस, वर्कलोड मैनेजमेंट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के चलते फ्रेंचाइजियों को अपने स्क्वॉड में बदलाव करना पड़ा है।
हालांकि, आईपीएल नियमों के तहत टीमों के पास रिप्लेसमेंट चुनने का विकल्प मौजूद है, जिससे ऑक्शन में अनसोल्ड रहे खिलाड़ियों के लिए नए मौके खुल गए हैं।
कई प्रमुख खिलाड़ी गंभीर चोटों से जूझ रहे हैं। श्रीलंकाई तेज गेंदबाज नुवान तुषारा को फिटनेस कारणों से अपने बोर्ड से एनओसी नहीं मिली, जबकि ऑस्ट्रेलियाई पेसर मिचेल स्टार्क को वर्कलोड मैनेजमेंट के चलते रोक लिया गया।
वहीं, इंग्लैंड के बल्लेबाज बेन डकेट ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को प्राथमिकता देते हुए आईपीएल से नाम वापस ले लिया।

आईपीएल में जब कोई खिलाड़ी टूर्नामेंट से बाहर होता है, तो फ्रेंचाइजी उसके स्थान पर रिप्लेसमेंट चुन सकती है। यह चयन केवल उसी खिलाड़ी पूल से किया जा सकता है, जिन खिलाड़ियों ने ऑक्शन के लिए अपना नाम रजिस्टर कराया था।
बीसीसीआई इस पूरी सूची को सार्वजनिक नहीं करता, बल्कि केवल शॉर्टलिस्ट खिलाड़ियों की जानकारी सामने आती है।
बीसीसीआई ने पिछले सीजन से नियमों में अहम बदलाव किया है। अब फ्रेंचाइजियां लीग के पहले 12 मैचों तक रिप्लेसमेंट चुन सकती हैं, जबकि पहले यह सीमा 7 मैचों तक ही थी।
रिप्लेसमेंट खिलाड़ी की सैलरी उस खिलाड़ी से ज्यादा नहीं हो सकती, जिसकी जगह वह टीम में शामिल हो रहा है। इसका मकसद टीमों को तय सैलरी कैप के भीतर रखना है।
हालांकि, रिप्लेसमेंट के लिए ‘लाइक-फॉर-लाइक’ होना जरूरी नहीं है। यानी किसी गेंदबाज के बाहर होने पर टीम बल्लेबाज को भी चुन सकती है।
उदाहरण के तौर पर, चेन्नई सुपर किंग्स ने चोटिल गेंदबाज गुरजपनीत सिंह की जगह दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज डेवाल्ड ब्रेविस को टीम में शामिल किया था।
यदि किसी खिलाड़ी को स्वास्थ्य कारणों से रिप्लेस किया जाता है, तो वह पूरे सीजन में दोबारा नहीं खेल सकता। हालांकि, फ्रेंचाइजी अगले सीजन के लिए उसे रिटेन कर सकती है।
बीसीसीआई ने पिछले साल अस्थायी रिप्लेसमेंट की भी अनुमति दी थी, लेकिन ऐसे खिलाड़ियों को अगले सीजन में रिटेन करने का विकल्प नहीं होता।
कुल मिलाकर, नए नियमों ने फ्रेंचाइजियों को ज्यादा लचीलापन दिया है और उन खिलाड़ियों के लिए उम्मीद की नई किरण जगाई है, जिन्हें ऑक्शन में मौका नहीं मिल सका था।
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