जम्मू-कश्मीर विधानसभा में जमकर हुई धक्का-मुक्की, प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी पर भिड़े भाजपा-कांग्रेस विधायक
Sandesh Wahak Digital Desk: जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत उम्मीद के उलट बेहद हंगामेदार और हिंसक मोड़ पर रही। सदन के भीतर राजनीतिक मर्यादाएं उस वक्त तार-तार हो गईं जब सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आपस में भिड़ गए और नौबत हाथापाई तक पहुँच गई।
सत्र की शुरुआत होते ही सदन का माहौल उस समय गरमा गया जब विपक्षी सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आक्रामक नारेबाजी शुरू कर दी। मुर्दाबाद के नारों के बीच भाजपा विधायक भड़क उठे और अपनी सीटों से खड़े होकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान जुबानी जंग इतनी बढ़ गई कि भाजपा विधायक युधवीर सेठी ने राहुल गांधी पर तंज कसा, तो दूसरी तरफ से कांग्रेस विधायक इरफान हाफिज लोन ने मोर्चा संभाल लिया।
हाथापाई की नौबत और मार्शलों का हस्तक्षेप
देखते ही देखते सदन का गलियारा अखाड़ा बन गया। विधायक अपनी सीटों से उठकर एक-दूसरे की ओर लपके, धक्का-मुक्की हुई और कुछ सदस्यों ने गुस्से में कागजात फाड़कर हवा में उछाल दिए। स्थिति को हाथ से निकलता देख विधानसभा के मार्शलों को तुरंत बीच-बचाव करना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद दोनों गुटों के विधायकों को शारीरिक रूप से एक-दूसरे से अलग किया।
#WATCH | Jammu | Scuffle erupts between Congress MLA Irfan Hafiz Lone and BJP MLA Yudvir Sethi, after Congress MLAs raised slogans against PM Modi, in the J&K Assembly
In response, BJP MLA Yudvir Sethi says, "Rahul Gandhi is Pappu".
Assembly proceedings adjourned for a short… pic.twitter.com/xYXOUXR3Bp
— ANI (@ANI) March 27, 2026
ईरान-इजरायल विवाद पर प्रदर्शन
हंगामे के पीछे केवल घरेलू राजनीति नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दे भी थे।
खामेनेई की हत्या का विरोध: नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस और पीडीपी के सदस्यों ने एकजुट होकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के खिलाफ इजरायल विरोधी नारेबाजी की। एनसी विधायक तनवीर सादिक ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार और पूरी पार्टी इस दुख की घड़ी में ईरान के साथ खड़ी है।
भाजपा की अपनी मांग: दूसरी ओर, भाजपा विधायक हाथों में तख्तियां लेकर जम्मू में ‘नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी’ की स्थापना की मांग को लेकर अड़े रहे।
स्पीकर अब्दुल रहीम राथर ने बार-बार सदन में शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन शोर-शराबे और आपसी तकरार के कारण प्रश्नकाल की कार्यवाही नहीं चल सकी। सदन में दो धड़े साफ नजर आए—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय संवेदनाओं और राजनीतिक नारों का मुद्दा था, तो दूसरी तरफ विकास और संस्थानों की मांग।
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