मानसून की बेरुखी से खरीफ बुवाई 23% घटी, El Nino की वजह से महंगाई का भी खतरा
Kharif Crop: देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की सुस्त चाल का असर अब खेती पर साफ दिखने लगा है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 25 जून तक खरीफ फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 23 फीसदी कम रही है। कमजोर बारिश और अल-नीनो के बढ़ते असर ने किसानों के साथ-साथ सरकार की भी चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो इसका असर खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ आने वाले महीनों में महंगाई पर भी पड़ सकता है।
धान, दाल और तिलहन की खेती प्रभावित
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 25 जून तक देश में खरीफ फसलों (Kharif Crop) की बुवाई 182.72 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 236.46 लाख हेक्टेयर थी।
सबसे ज्यादा असर धान और तिलहन की खेती पर पड़ा है।
- धान की बुवाई 25.17% घटकर 34.41 लाख हेक्टेयर से 25.75 लाख हेक्टेयर रह गई।
- तिलहन का रकबा 53.33% घटकर 16.99 लाख हेक्टेयर रह गया।
- दालों की बुवाई में 30.47% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि अरहर (तूर) का रकबा 8.45 लाख हेक्टेयर से घटकर 3.56 लाख हेक्टेयर रह गया।
- मोटे अनाज और कपास की बुवाई में भी उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, गन्ने और जूट के रकबे में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कमजोर मानसून और El Nino ने बढ़ाई चिंता
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, 24 जून तक देश में सामान्य से 42% कम बारिश दर्ज की गई है।
- मध्य भारत में 59% कम बारिश
- पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 41% कमी
- दक्षिण भारत में 28% कमी
- उत्तर-पश्चिम भारत में 22% कम वर्षा
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में सक्रिय अल-नीनो मानसून को और कमजोर कर सकता है, जिससे आने वाले हफ्तों में खेती पर दबाव और बढ़ने की आशंका है।
जलाशयों में घटता जलस्तर भी चिंता की वजह
बारिश की कमी का असर देश के प्रमुख जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, 166 बड़े जलाशयों में 25 जून तक कुल जल भंडारण उनकी क्षमता का सिर्फ 26.37% रह गया है।
स्थिति यह है कि 55 जलाशयों में पानी सामान्य स्तर के 80% से नीचे है। इनमें से 29 जलाशयों में जलस्तर सामान्य के 50% या उससे भी कम पहुंच चुका है।
महंगाई बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ हफ्तों में मानसून की रफ्तार नहीं बढ़ी तो खरीफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे बाजार में अनाज, दाल, तिलहन और अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति घटने का खतरा रहेगा, जिसका सीधा असर खाद्य कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
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