अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा, काउंटिंग रूम के बाथरूम में छिपाए जाते थे नोट

Ayodhya News: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में पुलिसिया तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौंकाने वाले राज फाश हो रहे हैं। पुलिस इस रैकेट से जुड़े आरोपियों को बारी-बारी से रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है। इसी कड़ी में बीते शनिवार को पुलिस ने मुख्य आरोपी टिन्नू यादव और उसके भतीजे मनीष को 39 घंटे की पुलिस रिमांड पर लिया। दोनों से हुई कड़ी पूछताछ में चोरी के उस शातिर नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसे जानकर अधिकारी भी हैरान हैं।

चेकिंग टीम के आने से पहले कोड वर्ड में मिलता था मैसेज

पूछताछ में यह बात सामने आई है कि जब दानपात्र से निकले चढ़ावे की गिनती चल रही होती थी, तभी पैसों को पार कर दिया जाता था। सूत्रों के अनुसार, टिन्नू यादव की मंदिर प्रबंधन और चेकिंग टीम की गतिविधियों पर पूरी नजर रहती थी। जैसे ही कोई अधिकारी या चेकिंग टीम काउंटिंग रूम की तरफ बढ़ती, टिन्नू तुरंत अपने भतीजे मनीष को अलर्ट कर देता था। मैसेज मिलते ही मनीष नोटों की गड्डियों को काउंटिंग रूम के पास ही बने बाथरूम में छिपा देता था।

पैसे ठिकाने लगाने के बाद मनीष बेहद शातिराना तरीके से दोबारा नोटों की गिनती के काम में जुट जाता था ताकि किसी को शक न हो। जैसे ही चेकिंग टीम वहां से रवाना होती, आरोपी बाथरूम में छिपाए गए कैश को निकाल लेते थे। जांच में यह भी साफ हुआ है कि इस बड़ी चोरी को अंजाम देने के लिए गिरोह के हर सदस्य का रोल पहले से फिक्स था। सीसीटीवी कैमरों की नजर और सुरक्षा घेरे को धत बताने के लिए बकायदा रणनीति तैयार की गई थी।

निर्मोही अखाड़े ने ट्रस्ट के खिलाफ खोला मोर्चा

इस विवाद के बीच राम मंदिर ट्रस्ट को जल्द ही नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए अब तक 2,300 से अधिक आवेदन मिल चुके हैं। दूसरी तरफ, मंदिर की साख को ठेस पहुंचने और ट्रस्ट के कथित गैर-पेशेवर कामकाज से नाराज निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट का रुख कर लिया है। अखाड़े ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग उठाई है।

निर्मोही अखाड़े ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से अपील की है कि राम मंदिर ट्रस्ट को एक सार्वजनिक (पब्लिक) ट्रस्ट घोषित किया जाए। साथ ही ट्रस्ट के अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की गई है। याचिका में साफ तौर पर कहा गया है कि अदालत इस बात की गहन जांच कराए कि साल 2019 में राम मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्देशों का जमीनी स्तर पर अक्षरशः पालन हुआ है या नहीं।

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