No Kings से गूंजा अमेरिका, ट्रंप की नीतियों और ईरान युद्ध के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों लोग

Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका और यूरोप के कई शहरों में शनिवार को No Kings के नारे के साथ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। हजारों लोग सड़कों पर उतरकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के साथ जारी युद्ध के खिलाफ आवाज उठाई। यह प्रदर्शन पूरे मध्य पूर्व को हिलाकर रख देने वाले संघर्ष, ऊर्जा कीमतों मंं उछाल और वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं के बीच हुए।

सबसे बड़ा प्रदर्शन सैन डिएगो में देखने को मिला, जहां करीब 40 हजार लोग सड़कों पर उतरे। वहीं, देश की राजधानी वॉशिंगटन, डीसी में लोग लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च करते नजर आए। उनके हाथों में तख्तियां थीं और जुबान पर No Kings का नारा था।

न्यूयॉर्क से लॉस एंजिल्स तक तनाव

न्यूयॉर्क शहर में सिविल लिबर्टीज संगठनों ने ट्रंप प्रशासन पर लोगों को डराने का आरोप लगाया। वहीं लॉस एंजिल्स में हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।

मिनेसोटा में ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने बढ़ाया जोश

मिनेसोटा राज्य में हजारों लोग एकजुट होकर ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीति के खिलाफ सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने इसे “तानाशाही के खिलाफ आवाज” बताया। यहां मशहूर अमेरिकी गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने मुख्य कार्यक्रम में प्रस्तुति दी और अपना गीत “Streets of Minneapolis” गाया, जिसे उन्होंने संघीय एजेंटों द्वारा हुई गोलीबारी की घटनाओं के विरोध में लिखा था।

90 लाख लोगों के जुटने का अनुमान

No Kings रैलियों के आयोजकों के अनुसार, इससे पहले जून में 50 लाख और अक्टूबर में 70 लाख लोग इन प्रदर्शनों में शामिल हुए थे। इस बार करीब 90 लाख लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया गया है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

यूरोप में भी गूंजा विरोध

अमेरिका के अलावा इटली, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई यूरोपीय देशों में भी विरोध प्रदर्शन हुए।

रोम में हजारों लोगों ने मार्च किया

लंदन में लोगों ने नस्लवाद और युद्ध के खिलाफ नारे लगाए

पेरिस में भी इसी तरह के प्रदर्शन हुए

व्हाइट हाउस ने कहा- यह वामपंथी फंडिंग नेटवर्क का नतीजा

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने इन प्रदर्शनों को वामपंथी फंडिंग नेटवर्क का नतीजा बताया और कहा कि इन्हें आम जनता का ज्यादा समर्थन नहीं है। वहीं रिपब्लिकन नेताओं ने भी इन रैलियों की कड़ी आलोचना की। यह प्रदर्शन उस समय हो रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है, ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया भर में महंगाई ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।

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