PoK में आसिम मुनीर को खुली चुनौती, भारत से व्यापारिक रास्ते खोलने की उठी मांग

PoK Protest News: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं और हालात अब पहले से अधिक तनावपूर्ण दिखाई दे रहे हैं। बढ़ती महंगाई, आटे और बिजली की कीमतों में भारी वृद्धि के साथ-साथ आर्थिक संकट के कारण लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आवाज उठाने वालों पर सख्ती कर रही है। हाल के दिनों में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा की गई कार्रवाई ने हालात को और गंभीर बना दिया है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रही जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने अब सीधे पाकिस्तानी सेना और उसके प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को चुनौती देते हुए क्षेत्र के लोगों के अधिकारों और आर्थिक सुविधाओं की मांग तेज कर दी है।

लोगों ने मांगी फैसले लेने की आजादी 

रावलकोट में आयोजित एक बड़ी जनसभा में जेएएसी और अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं ने पाकिस्तान सरकार और सेना की भूमिका पर सवाल उठाए। जेएएसी के प्रमुख नेता सरदार अमान ने कहा कि यदि पाकिस्तान क्षेत्र के लोगों को जरूरी सुविधाएं और आर्थिक पहुंच उपलब्ध नहीं करा सकता, तो भारत के साथ व्यापार के वैकल्पिक रास्ते खोले जाने चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी व्यापारिक मार्ग जल्द खोले जाएं, चाहे वे पाकिस्तान के जरिए हों या भारत के जरिए। उनका कहना है कि स्थानीय लोगों को अपने राजनीतिक भविष्य और सुरक्षा से जुड़े फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। सरदार अमान ने पाकिस्तान पर क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन विकास कार्यों में पर्याप्त निवेश नहीं हो रहा।

आपको बता दें कि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले कार्यकर्ताओं को आतंकवादी बताकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार और सेना अपनी नीतियों के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को सुरक्षा के नाम पर दबाना चाहती है।

आरक्षित सीटों को लेकर जनता में नाराजगी 

PoK में शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को लेकर भी विवाद गहरा गया है। जेएएसी का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन सीटों का उपयोग अपने राजनीतिक हितों के लिए करती है। 27 जुलाई को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह मुद्दा और गरमा गया है।

हाल ही में एक साथी कार्यकर्ता की हत्या के विरोध में रावलकोट में जुटे प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं, जिनमें कई लोगों की मौत हुई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 45 सदस्यीय विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों के कारण स्थानीय जनता का प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ता है। इसलिए इन सीटों से आरक्षण समाप्त करने की मांग लगातार उठ रही है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.