जल्दी वापसी या पूरी फिटनेस? टीम इंडिया के इंजरी मैनेजमेंट पर उठे सवाल
Sports News: भारतीय क्रिकेट में इन दिनों चर्चा सिर्फ इस बात की नहीं है कि कौन खिलाड़ी कब फिट होगा, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि फिट होने के बाद वह कितने समय तक मैदान पर टिक पाएगा।
लंबे रिहैब के बाद वापसी करने वाले खिलाड़ी अगर कुछ मैचों के बाद फिर चोटिल हो जाते हैं, तो इससे टीम इंडिया के इंजरी मैनेजमेंट सिस्टम पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
इसी बीच भारतीय टीम के फिजियोथेरेपिस्ट कमलेश जैन का कॉन्ट्रैक्ट खत्म किए जाने की रिपोर्ट सामने आई है।
बताया जा रहा है कि जैन फिलहाल नोटिस पीरियड पर हैं और उनकी जगह जल्द नया मेडिकल सपोर्ट स्टाफ नियुक्त किया जा सकता है।
हालांकि, इस फैसले को सीधे किसी खिलाड़ी की चोट से जोड़ना उचित नहीं होगा।
सवाल चोट का नहीं, इंजरी साइकिल का है
तेज गेंदबाजों और लगातार क्रिकेट खेलने वाले खिलाड़ियों का चोटिल होना खेल का हिस्सा है। लेकिन परेशानी तब बढ़ती है, जब कोई खिलाड़ी चोट से उबरने, रिहैब पूरा करने और फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद दोबारा मेडिकल रूम पहुंच जाता है।
ऐसे मामलों में कई सवाल उठते हैं। क्या चोट की सही पहचान हुई थी? क्या रिहैब की प्रक्रिया पर्याप्त थी?
क्या खिलाड़ी को समय से पहले मैदान पर उतार दिया गया? या फिर वापसी के बाद उसका वर्कलोड सही तरीके से मैनेज नहीं हुआ?
इसलिए अब ‘जल्दी वापसी’ के बजाय सही और टिकाऊ वापसी पर जोर देने की जरूरत है।
चार महीने में लौटने से बेहतर है कि खिलाड़ी छह महीने ले, लेकिन इसके बाद लगातार क्रिकेट खेल सके।
बुमराह से हर्षित राणा तक, कई मामले चर्चा में
जसप्रीत बुमराह का मामला इसका ताजा उदाहरण है। जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे के दौरान बाएं घुटने में चोट लगने के बाद वह श्रीलंका टेस्ट सीरीज से बाहर हो गए।
बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैब के बावजूद उनकी समय पर वापसी नहीं हो सकी। अब अफगानिस्तान टी20 सीरीज और एशियन गेम्स से पहले उनकी फिटनेस पर चर्चा हो रही है।
रिपोर्टों के मुताबिक, बुमराह ने फिटनेस टेस्ट पास कर लिया है, लेकिन सवाल यह है कि वह कितने वर्कलोड के लिए तैयार हैं।
प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद शमी और ऋषभ पंत के मामले भी बताते हैं कि लंबा रिहैब हमेशा खराब नहीं होता। कई बार पूरी तरह फिट होने के लिए खिलाड़ी को पर्याप्त समय देना जरूरी होता है।
वहीं, हर्षित राणा का ताजा मामला चिंता बढ़ाता है। हैमस्ट्रिंग चोट के कारण टी20 वर्ल्ड कप और आईपीएल से बाहर रहने के बाद वापसी करते समय वह फिटनेस टेस्ट में फिर चोटिल हो गए।
इसके चलते वह अफगानिस्तान सीरीज और एशियन गेम्स से बाहर हो गए।
अब जल्दी नहीं, सही वापसी जरूरी
भारतीय क्रिकेट के पास आधुनिक मेडिकल सुविधाएं और मजबूत सपोर्ट सिस्टम है। ऐसे में लक्ष्य सिर्फ खिलाड़ी को जल्द मैदान पर लाना नहीं, बल्कि उसे लंबे समय तक फिट रखना होना चाहिए।
चोट की पहचान, ट्रेनिंग, वर्कलोड, रिकवरी और रिहैब, इन सभी स्तरों की नियमित समीक्षा जरूरी है।
टीम इंडिया के लिए असली सफलता यह नहीं कि खिलाड़ी चार महीने बाद लौट आया, बल्कि यह है कि वह चार महीने, छह महीने और एक साल बाद भी लगातार मैदान पर मौजूद रहे।
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