स्मार्ट सिटी योजना पर राहुल गांधी का हमला, सरकार से मांगा हिसाब
Sandesh Wahak Digital Desk: राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने संसद कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्मार्ट सिटी मिशन को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि कोई भी शहर तब तक स्मार्ट नहीं हो सकता, जब तक वह अपने नागरिकों को बुनियादी गरिमा, साफ पानी, स्वच्छ हवा और सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराता।
Rahul Gandhi ने परिणामों पर जताई शंका
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि जब यह योजना अपने समापन की ओर है, तब उन्होंने संसद में सरकार से इसके वास्तविक परिणामों का हिसाब मांगा। उनके मुताबिक जो तथ्य सामने आए, वह धोखे से कम नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना का उद्देश्य कभी भी पूरे शहर का विकास करना नहीं था, बल्कि इसे एक बड़े बदलाव की कहानी के रूप में पेश किया गया।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने सरकार से पूछा कि स्मार्ट सिटी की सफलता किस आधार पर तय की गई, कितने शहर वास्तव में बदले और लोगों के जीवन में क्या ठोस सुधार आया। उन्होंने दावा किया कि इन सवालों का सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
खर्च और दावों पर उठाए सवाल
उन्होंने (Rahul Gandhi) कहा कि सरकार की ओर से बताया गया कि करीब 48,000 करोड़ रुपये खर्च किए गए और 97 प्रतिशत प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, लेकिन अगर सब कुछ पूरा हो गया है तो आम लोगों के जीवन में बदलाव क्यों नजर नहीं आता। राहुल गांधी ने कहा कि जमीनी हकीकत इससे अलग है, जहां दूषित पानी, खुले सीवर, गिरते पुल और धंसती सड़कें योजना की विफलता को उजागर कर रही हैं।
राहुल गांधी ने इसे मोदी सरकार की कार्यशैली का उदाहरण बताते हुए कहा कि घोषणाएं बड़ी होती हैं, प्रचार उससे भी बड़ा होता है, लेकिन जवाबदेही शून्य रहती है। उन्होंने लोगों से अपने-अपने शहरों की स्थिति देखने और खुद आकलन करने की अपील की।
केरल चुनाव को लेकर भी लगाए आरोप
केरल चुनाव के संदर्भ में भी राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि राज्य में सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा चुनाव जीते। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा एलडीएफ और भाजपा की संयुक्त ताकत से मुकाबला कर रहा है।
इस तरह राहुल गांधी ने स्मार्ट सिटी योजना और केरल चुनाव दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जिससे सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।
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