सुप्रीम कोर्ट से पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को राहत, UP पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई और भविष्य की FIR पर भी रोक

Sandesh Wahak Digital Desk: अयोध्या के राम मंदिर चंदा घोटाले की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को उच्चतम न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने गाजियाबाद (इंदिरापुरम) में उनके खिलाफ दर्ज कथित रोड रेज की एफआईआर के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा किसी भी कठोर या दंडात्मक कार्रवाई करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने इस अंतरिम संरक्षण का दायरा बढ़ाते हुए निर्देश दिया है कि भविष्य में भी यूपी पुलिस द्वारा दर्ज की जाने वाली किसी भी संभावित एफआईआर के तहत उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए गाजियाबाद पुलिस आयुक्त को एफआईआर की प्रति पत्रकार को तुरंत उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय में उचित कानूनी राहत (एफआईआर रद्द कराने) के लिए याचिका दायर कर सकें। शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर को तय करते हुए पुलिस आयुक्त से अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है।

राम मंदिर चंदे की रिपोर्टिंग और सीसीटीवी साक्ष्य मिटाने का आरोप

अभिषेक उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राय ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता का एकमात्र अपराध राम मंदिर चंदे से जुड़ी अनियमितताओं और अन्य मामलों में निष्पक्ष खोजी रिपोर्टिंग करना था। वकील ने 18 अगस्त के रोड रेज मामले को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए स्वतंत्र एजेंसी (CBI) से निष्पक्ष जांच कराने और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखने की मांग की।

याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस ने घटनास्थल के दुकानदारों पर सीसीटीवी फुटेज मिटाने का दबाव बनाया और 20 अगस्त की रात उनके आवास पर परिजनों की मौजूदगी में दबिश दी। वहीं दूसरी तरफ, पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर में शिप्रा मॉल के पास कार-बाइक की टक्कर, गाली-गलौज और धमकी का आरोप लगाया गया है, जिसे पत्रकार ने सिरे से खारिज करते हुए एफआईआर में दर्ज बाइक नंबर की विसंगति का भी दावा किया है।

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