शाइन सिटी घोटाला: फाइनेंस प्रोजेक्टों से ठगे हजारों करोड़, जांच पी गयीं एजेंसियां
Sandesh Wahak Digital Desk: शाइन सिटी घोटाला 60 हजार करोड़ से ऊपर का है। अभी तक जांच के दौरान ईडी, ईओडब्ल्यू, एसएफआईओ जैसी एजेंसियों के हाथ सिर्फ 1100 करोड़ की गड़बडिय़ों तक पहुंच सके हैं।

एजेंसियों का मुख्य फोकस जमीनों के खेल पर है। जबकि घोटाले में जमीनों का खेल महज चंद प्रतिशत ही है। इस कलंक कथा का पूरा सार फाइनेंस के सेक्टर में लाई गयी जिन अलग-अलग योजनाओं में छिपा है। उसकी जांच में एजेंसियां मानो अंधेरे में तीर चला रही हैं। जबकि इसी तिकड़म के जरिये गु्रप के मुखिया भगोड़े राशिद नसीम के ऊपर निवेशकों के हजारों करोड़ हड़पने के संगीन आरोप लगे हैं।

कठघरे में ईओडब्ल्यू और ईडी जैसी एजेंसियां
शाइन जॉइन फोरेक्स ट्रेडिंग (एसजेएफएक्स) की योजना में सिर्फ डॉलर में निवेश कराकर साप्ताहिक रिटर्न का झांसा दिया जाता था। बाकायदा मेटा ट्रेडर्स पर ऐप बनाकर मानो इनसाइडर ट्रेडिंग के जरिये हजारों करोड़ की कमाई की गयी है। इसी कार्य के लिए राशिद की कंपनी शाइन ज्वाइन एफएक्स लि. 71-75 सेल्टन स्ट्रीट कोवेंट गार्डेन, लंदन के पते पर रजिस्टर्ड हुई थी। कहा जाता है कि लंदन की इस इमारत को भी राशिद ने खरीदा था। इसी पते पर पीएनबी घोटाले के मुखिया मेहुल चोकसी की कंपनी भी रजिस्टर्ड थी।
एसएफआईओ, ईओडब्ल्यू और ईडी के जिम्मे इस प्रकरण की जांच है। नेपाल में इसी मामले में राशिद की गिरफ्तारी भी हुई थी। बाद में यह महाठग दुबई भाग गया। एजेंसियों के हाथ फोरेक्स ट्रेडिंग घोटाले में खाली हैं। अगला नंबर पीआईपी प्लान का है। इसमें जिलों में प्लाट की बुकिंग कराकर एक साल बाद कई गुना रिटर्न देने का झांसा देकर लूट की गयी है।
फॉरेक्स ट्रेडिंग पीआईपी प्लान, एसवीसी जैसे तमाम प्रोजेक्टों की जांच अधर में
सूत्रों के मुताबिक राजस्थान के दौसा में ही 58 हजार प्लॉट की बुकिंग करके अरबों रुपए हजम किये गए हैं। दर्जन भर से ऊपर शहरों में योजना के जरिये भारी संख्या में प्लॉट बुक किये गये। जिसके तार यूपी, एमपी, राजस्थान, असम समेत कई राज्यों से जुड़े हैं। सूत्रों की माने तो प्रोजेक्ट का पैसा गु्रप में निदेशक रहे अमिताभ श्रीवास्तव की कंपनी किंग्स्टन बिल्डकॉन में डायवर्ट हुआ। पैसा लेकर कम कीमत पर लग्जरी गाडिय़ों को दिलाने का खेल भी इसमें शामिल है।
इसके बाद बारी एसवीसी (शाइन वी क्वाइन) नाम से लांच क्रिप्टो करेंसी का है। निवेशकों से इसके जरिये भारी कमाई की गयी है। मनीलांड्रिंग की जांच के दौरान ईडी इसकी भी तह में नहीं गयी। कुछ ऐसा ही हाल अंत में गेट द विक्ट्री क्वाइन अर्थात जीडीवीसी जैसे प्रोजेक्ट का भी है। फाइनेंस सेक्टर की इन योजनाओं के सहारे हजारों करोड़ की काली कमाई करने का आरोप है।
ईडी-ईओडब्ल्यू की जांच से शाइन सिटी घोटाले की असली कलंक कथा मानो पूरी तरह गायब है। सिर्फ यही नहीं आगरा, रायबरेली, झांसी और मथुरा समेत अन्य शहरों में कम्पनी के जो प्रोजेक्ट चल रहे थे। उनसे जुड़ी जमीनें व अन्य सम्पत्तियां जब्त नहीं किये जाने के आरोप भी लग रहे हैं। घोटाले में ईडी ने अभी तक सिर्फ दो सौ करोड़ से ज्यादा की सम्पत्तियां जब्त की हैं। कुल मिलाकर यूपी के सबसे बड़े घोटाले की जांच भगवान भरोसे ही चल रही है।
बताये 168 बैंक खाते, जांच सिर्फ 35 की क्यों : श्रीवास्तव
घोटाले में ठगे गए निवेशकों की अदालती जंग लड़ रहे वरिष्ठ अधिवक्ता एसएन श्रीवास्तव का कहना है कि ईडी-ईओडब्ल्यू ने तीन बैंकों के 35 खातों की जांच की है। कोर्ट में 1086 करोड़ का लेनदेन दिखाते हुए 168 खाते बैंक एजेंसियों ने बताये थे। मात्र 35 खातों की जांच हुई। इसका मतलब घोटाले में सही जांच नहीं हो रही है। शुरुआती जांच के दौरान ईडी को फाइनेंस से रिलेटेड प्रोजेक्टों की पूरी जानकारी दी गयी थी। लेकिन जांच ही ठीक से नहीं हुई।
कम्पनी के पूर्व निदेशकों पर ईडी की दरियादिली
शाइन सिटी के जिन डायरेक्टरों को ईओडब्ल्यू ने गिरफ्तार किया था। ईडी ने उनको बख्शते हुए विस्तृत जांच और गिरफ्तारी से दूर ही रखा। इनकी सम्पत्तियों को भी मनीलांड्रिंग की जांच के दौरान जब्त नहीं किया गया। इस फेहरिस्त में चमनलाल दिवाकर, विनय सिंह, वसीम और दुर्गा प्रसाद जैसे कई नाम बताएं जा रहे हैं।

