इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति को भेजी चिट्ठी
Sandesh Wahak Digital Desk: चर्चित कैश कांड में घिरे इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप दिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब उनके खिलाफ गंभीर आरोपों की आंतरिक जांच चल रही थी और संसद में महाभियोग की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।
जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय विवादों के केंद्र में आए थे, जब दिल्ली स्थित उनके आवास पर कथित तौर पर भारी मात्रा में जला हुआ कैश बरामद हुआ था। इस घटना के बाद हड़कंप मच गया था और उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट से हटाकर वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट तबादला कर दिया गया था।
महाभियोग और जांच समिति का घेरा
जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पिछले साल संसद में उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की मांग उठी थी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव और वरिष्ठ अधिवक्ता बीवी आचार्य की एक समिति गठित की थी। बताया जा रहा है कि यह समिति आगामी मानसून सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने भी जांच समिति के गठन को चुनौती देने वाली जस्टिस वर्मा की याचिका को खारिज कर दिया था।
जस्टिस यशवंत वर्मा ने 5 अप्रैल, 2025 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में शपथ ली थी। हालांकि, संसद के दोनों सदनों में उनके खिलाफ प्रस्ताव पेश होने और महाभियोग की कार्यवाही शुरू होने के बाद से ही उन पर दबाव बढ़ गया था। राज्यसभा में तत्कालीन सभापति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे और बाद में प्रस्ताव के तकनीकी पेचों के बीच, लोकसभा अध्यक्ष ने जांच को आगे बढ़ाया था।
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