भारत-नेपाल सीमा पर बरामद 22 किलो नशीले पदार्थ की जांच रिपोर्ट एक माह बाद भी अटकी, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

Balrampur News: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी के दावों के बीच एक माह पूर्व बरामद किए गए 22 किलोग्राम संदिग्ध मादक पदार्थ का रहस्य अब तक गहराया हुआ है। सीमा से करीब पांच किलोमीटर भीतर कस्टम विभाग द्वारा पकड़ी गई इस भारी खेप की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट 30 दिन बीत जाने के बाद भी नहीं आ सकी है। रिपोर्ट में हो रही इस अप्रत्याशित देरी ने जहां जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं सीमावर्ती इलाकों में चरस, अफीम और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।

गत 21 जुलाई को कस्टम अधीक्षक प्रशांत कुमार, निरीक्षक राहुल यादव और सिपाही दीपक की टीम ने नियमित जांच के दौरान 22 किलो संदिग्ध पदार्थ पकड़ा था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान संदिग्ध नेपाली तस्कर टीम को चकमा देकर महज दो सौ मीटर दूर स्थित सोहेलवा जंगल में फरार होने में कामयाब रहा।

कस्टम अधिकारियों ने बरामद सामग्री को विधिवत सील कर रासायनिक परीक्षण के लिए केंद्रीय राजस्व नियंत्रण प्रयोगशाला (सीआरसीएल) नई दिल्ली भेजा था। अफीम नेपाल में प्रतिबंधित होने के कारण स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज है कि यदि यह अफीम है तो संभवतः इसे पाकिस्तान या किसी तीसरे देश के रास्ते लाया गया होगा, अथवा यह उच्च गुणवत्ता वाली नेपाली चरस हो सकती है।

तस्करी का यह अकेला मामला नहीं है। बीते चार अगस्त को भी एसएसबी जवानों ने नेपाल से 85 हजार रुपये की भारतीय नकदी अवैध रूप से ला रहे बघेलखंड निवासी महफूज को पकड़ा था, जिसकी जांच कस्टम अधीक्षक कार्यालय बढ़नी में चल रही है। खुली सीमा और घने जंगलों का फायदा उठाकर तस्कर मुख्य और गैर-पारंपरिक मार्गों से नशे का अवैध जाल फैला रहे हैं, जो सीधे तौर पर भारतीय युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहा है।

जांच में देरी को लेकर कस्टम चौकी निरीक्षक राहुल यादव ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय लैब में देशभर से संदिग्ध पदार्थों के नमूने परीक्षण के लिए पहुंचते हैं, जिनका क्रमवार विश्लेषण किया जाता है। रिपोर्ट में तेजी लाने के लिए दो दिन पूर्व ही संबंधित प्रयोगशाला को रिमाइंडर भेजा गया है। आधिकारिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बात की औपचारिक पुष्टि हो सकेगी कि बरामद सामग्री किस श्रेणी का मादक पदार्थ है।

रिपोर्ट- योगेंद्र त्रिपाठी

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