UP: कानपुर से साइबर गैंग का पर्दाफाश, CBI अफसर बनकर ठगे 225 करोड़! 6 गिरफ्तार

UP Crime News: देशभर में लोगों को CBI और अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराने-धमकाने वाले बड़े साइबर ठगी गिरोह का कानपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। करीब तीन साल में 225 करोड़ रुपये से अधिक की साइबर ठगी करने वाले नेटवर्क के सरगना समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी कॉल और डिजिटल अरेस्ट के जरिए लोगों को निशाना बनाते थे।

डीसीपी पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी के मुताबिक, राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और प्रतिबिंब ऐप पर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद शिवराजपुर क्षेत्र पुलिस की निगरानी में आया। जांच के दौरान बहरमापुर इलाके में छापेमारी कर छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वे फोन, व्हाट्सएप और टेलीग्राम के माध्यम से लोगों से संपर्क करते थे। खुद को CBI, पुलिस या अन्य केंद्रीय एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को आतंकवाद, मनी लॉन्ड्रिंग या अश्लील वेबसाइट देखने जैसे मामलों में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद पीड़ितों को “डिजिटल अरेस्ट” कर उनसे रकम ट्रांसफर करवा लेते थे।

450 म्यूल अकाउंट्स से चल रहा था पूरा नेटवर्क

पुलिस जांच में पता चला है कि गिरोह ने आसपास के गांवों और कस्बों के लोगों को लालच देकर लगभग 450 बैंक खाते खुलवाए थे। इन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को इधर-उधर करने में किया जाता था।

गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 5 मोबाइल फोन, 1 टैबलेट, 10 बैंक पासबुक, 2 चेकबुक, 12 डेबिट कार्ड बरामद किए गए हैं।

क्रिप्टोकरेंसी में छिपाते थे ठगी का पैसा

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी साइबर ठगी से हासिल रकम को सीधे इस्तेमाल करने के बजाय क्रिप्टोकरेंसी में निवेश कर देते थे। इसके बाद पीयर-टू-पीयर (P2P) ट्रांजैक्शन के जरिए रकम को रुपये और डॉलर में बदलकर वापस निकालते थे, ताकि मनी ट्रेल पकड़ में न आ सके।

पुलिस के अनुसार गिरोह का मास्टरमाइंड कन्नौज निवासी राजन कटियार है, जबकि सूरज कुमार उसका प्रमुख सहयोगी बताया गया है। मामले में आधा दर्जन से अधिक आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश के लिए कई टीमें लगाई गई हैं।

देशभर से मिली थीं शिकायतें

गिरोह के खिलाफ तेलंगाना, कर्नाटक, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से शिकायतें दर्ज हुई थीं। पुलिस का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी की रकम और पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है।

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