वृद्धावस्था पेंशन में बड़ा बदलाव, अब केवल ‘आधार’ से नहीं मिलेगी पेंशन, अनिवार्य हुए ये 3 दस्तावेज
मलिहाबाद प्रशासन का अलर्ट- जन्म प्रमाण पत्र, मार्कशीट या परिवार रजिस्टर की नकल जरूरी, आधार कार्ड में दर्ज उम्र और वास्तविक आयु में अंतर मिलने के बाद लिया गया सख्त फैसला
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना की पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया है। अब तक पेंशन के लिए आधार कार्ड को उम्र के प्राथमिक प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता था, लेकिन अब इसे अमान्य कर दिया गया है। नए नियमों के मुताबिक, केवल आधार कार्ड के आधार पर आयु का सत्यापन नहीं होगा, जिससे हजारों आवेदकों को अब वैकल्पिक दस्तावेज जुटाने होंगे।
क्यों पड़ी नियमों को बदलने की जरूरत?
मलिहाबाद के सहायक विकास अधिकारी (समाज कल्याण) प्रदीप कुमार ने बताया कि जांच के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि और व्यक्ति की वास्तविक उम्र में काफी अंतर पाया गया। कई अपात्र लोग गलत उम्र दर्ज कराकर योजना का लाभ ले रहे थे। योजना का लाभ केवल उन्हीं को मिले जो वास्तव में इसके पात्र हैं, इसीलिए अब आधार को उम्र के एकमात्र साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इन 3 दस्तावेजों में से एक होना अनिवार्य
अब वृद्धावस्था पेंशन के नए आवेदकों को आवेदन के साथ नीचे दिए गए तीन दस्तावेजों में से कम से कम एक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा।
- जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
- हाईस्कूल की मार्कशीट (10th Marksheet)
- परिवार रजिस्टर की नकल (Family Register Copy)
इनके बिना अब पेंशन का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामीण बुजुर्गों के सामने बड़ी चुनौती
इस अचानक हुए बदलाव से विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के उन बुजुर्गों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है जिन्होंने कभी स्कूल का मुंह नहीं देखा या जिनका जन्म पंजीकरण नहीं हुआ था। ऐसे बुजुर्गों के लिए ‘परिवार रजिस्टर की नकल’ सबसे महत्वपूर्ण और सुलभ विकल्प के रूप में उभरी है। वे ब्लॉक या पंचायत स्तर से इसे प्राप्त कर अपना आवेदन पूर्ण कर सकते हैं।
पारदर्शिता बनाम असुविधा
जहाँ एक ओर प्रशासन का मानना है कि इस कदम से बिचौलियों और फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी, वहीं स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का कहना है कि अचानक नियमों में बदलाव से अशिक्षित और असहाय बुजुर्गों को दस्तावेज जुटाने में भाग-दौड़ करनी पड़ेगी। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन बुजुर्गों को जागरूक करने और उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने की होगी।
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