RSS में पारदर्शिता की मांग पर बवाल, मोहन भागवत ने दिया सख्त जवाब

 Mohan Bhagwat: भारत में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और कांग्रेस के बीच एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने RSS से उसकी पारदर्शिता, रजिस्ट्रेशन और फंडिंग को लेकर सवाल उठाए। 

उन्होंने संगठन की आय, खर्च, संपत्ति और गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की। इस पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने सख्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह मांग राजनीतिक प्रेरणा से की गई है और इसका कोई वास्तविक आधार नहीं है।

खड़गे ने RSS की फंडिंग को लेकर उठाए सवाल 

प्रियंक खड़गे ने 13 जून को RSS प्रमुख को एक खुला पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा कि देशभर में सक्रिय हजारों शाखाओं वाले संगठन को NGO, कंपनियों और धार्मिक संस्थानों की तरह पारदर्शिता नियमों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी पूछा कि RSS का रजिस्ट्रेशन कैसे होता है और उसकी फंडिंग कहां से आती है।

इस मुद्दे पर 14 जून 2026 को केरल के त्रिशूर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें इस पत्र का जवाब देने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में कई ऐसे संगठन हैं जो बिना रजिस्ट्रेशन के भी काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि RSS कोई गुप्त संगठन नहीं है और उसकी गतिविधियां सार्वजनिक रूप से चलती हैं।

RSS को सरकार से नहीं मिलता फंड 

RSS प्रमुख ने स्पष्ट किया कि संगठन को सरकार से कोई फंड नहीं मिलता, इसलिए रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता नहीं बनती। उन्होंने कहा कि RSS की शाखाएं और सामाजिक गतिविधियां पूरी तरह सार्वजनिक रूप से चलती हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि संगठन पर पहले प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे बाद में हटा दिया गया था, जिससे उसकी कानूनी स्थिति स्पष्ट होती है।

मोहन भागवत ने यह भी कहा कि अदालतों और आयकर विभाग ने RSS को ‘व्यक्तियों का समूह’ मानते हुए कर छूट दी है। इस पूरे विवाद ने एक बार फिर देश की राजनीति में पारदर्शिता और संगठनात्मक जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है।

Get real time updates directly on you device, subscribe now.