भारत में धूप की कमी नहीं, फिर भी क्यों घट रहा Vitamin D, महिलाओं में आए चौंकाने वाले आंकड़े
Health Tips: भारत में पर्याप्त धूप होने के बावजूद विटामिन D की कमी तेजी से आम पोषण समस्या बन रही है। यह सिर्फ हड्डियों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि शरीर में कैल्शियम और फॉस्फोरस के अवशोषण, मांसपेशियों और प्रतिरक्षा तंत्र के सामान्य कामकाज में भी इसकी भूमिका होती है।
भारत में हुए 97 अध्ययनों के विश्लेषण में अलग-अलग समूहों के करीब 61 प्रतिशत लोगों में विटामिन D की कमी पाई गई। दिल्ली-एनसीआर में प्रजनन आयु की महिलाओं पर हुए एक अध्ययन में करीब 88 प्रतिशत महिलाओं में इसकी कमी मिली। दक्षिण भारत के एक अध्ययन में भी करीब 75 प्रतिशत शहरी और 70 प्रतिशत ग्रामीण महिलाओं में स्तर कम पाया गया।
किशोरावस्था और युवावस्था में विटामिन D और कैल्शियम मजबूत हड्डियों के विकास में मदद करते हैं। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान इनकी जरूरत बढ़ जाती है। वहीं, रजोनिवृत्ति के बाद हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।
गर्भावस्था में भी बढ़ जाती है जरूरत
उत्तर भारत में 418 स्वस्थ गर्भवती महिलाओं पर हुए अध्ययन में 93.5 प्रतिशत महिलाओं में विटामिन D की कमी मिली। चेन्नई के एक अध्ययन में यह आंकड़ा करीब 62 प्रतिशत था। कुछ अध्ययनों में कमी और गर्भावस्था के दौरान हाई ब्लड प्रेशर, गर्भकालीन मधुमेह, समय से पहले प्रसव और कम जन्म-वजन के बीच संबंध मिला है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि इन समस्याओं की वजह सिर्फ विटामिन D की कमी है।
धूप के बावजूद कमी क्यों
घर और ऑफिस में ज्यादा समय बिताना, शरीर को ढककर रखना, प्रदूषण, मौसम और धूप में कम रहना विटामिन D बनने को प्रभावित कर सकते हैं। इसके स्रोतों में अंडे की जर्दी, वसायुक्त मछली, फोर्टिफाइड दूध और कुछ मशरूम शामिल हैं। कैल्शियम के लिए दूध, रागी, तिल और हरी सब्जियां उपयोगी हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के विटामिन D की अधिक मात्रा लेना नुकसानदायक हो सकता है।
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