US-Iran में तो हो गई सुलह, लेकिन Russia Ukraine War क्यों नहीं रुक रहा? जानिए किन शर्तों पर अटकी है डील

Russia-Ukraine War: करीब चार साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध आज भी दुनिया के सबसे बड़े सैन्य संघर्षों में शामिल है। हाल ही में ईरान और अमेरिका के बीच लंबे तनाव के बाद शांति समझौते की खबरें सामने आईं, लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम की संभावनाएं अब भी धुंधली नजर आ रही हैं। दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध के लंबे खिंचने के पीछे सिर्फ सैन्य कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक, रणनीतिक और भू-राजनीतिक मतभेद भी जिम्मेदार हैं।

 

Russia-Ukraine War: क्यों नहीं हो रहा समझौता?

दोनों देशों के लक्ष्य बिल्कुल अलग

रूस और यूक्रेन युद्ध को लेकर अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।

  • रूस चाहता है कि क्षेत्र में उसका प्रभाव और नियंत्रण बना रहे।
  • यूक्रेन अपनी संप्रभुता और स्वतंत्रता से समझौता करने को तैयार नहीं है।
  • दोनों देशों की रणनीतिक प्राथमिकताएं एक-दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं।

यही वजह है कि बातचीत के बावजूद कोई साझा रास्ता नहीं निकल पा रहा।

जमीन और कब्जे का सबसे बड़ा विवाद

युद्ध का सबसे बड़ा मुद्दा उन क्षेत्रों को लेकर है जिन पर रूस ने नियंत्रण स्थापित किया है।

यूक्रेन की मांग:

  • 1991 की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बहाल की जाएं।
  • क्रीमिया समेत सभी कब्जाए गए क्षेत्र वापस किए जाएं।

रूस की मांग:

  • क्रीमिया पर रूसी नियंत्रण को मान्यता मिले।
  • दोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिझिया जैसे क्षेत्रों पर रूसी अधिकार स्वीकार किया जाए।

इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सबसे गहरी खाई बनी हुई है।

नाटो सदस्यता बना बड़ा विवाद

  • रूस-यूक्रेन संघर्ष में नाटो (NATO) की भूमिका भी अहम मानी जाती है।
  • यूक्रेन अपनी सुरक्षा के लिए नाटो में शामिल होना चाहता है।
  • रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
  • मॉस्को की मांग है कि यूक्रेन भविष्य में कभी भी नाटो का सदस्य न बने।

यूक्रेन इस शर्त को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं दिखता।

सेना को लेकर भी टकराव

रूस चाहता है कि यूक्रेन की सैन्य क्षमता सीमित कर दी जाए ताकि भविष्य में वह खतरा न बन सके।

वहीं यूक्रेन का कहना है कि:

  • मजबूत सेना उसकी सुरक्षा के लिए जरूरी है।
  • बिना सैन्य शक्ति के वह भविष्य के किसी भी खतरे के सामने कमजोर पड़ जाएगा।

युद्ध अपराध और हर्जाने पर मतभेद

यूक्रेन लगातार मांग करता रहा है कि:

  • युद्ध के दौरान हुई तबाही के लिए जवाबदेही तय हो।
  • नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाना दिया जाए।

रूस इन मांगों को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है, जिससे बातचीत और जटिल हो जाती है।

बाहरी समर्थन भी बढ़ा रहा युद्ध की अवधि

इस संघर्ष में दोनों पक्षों को अलग-अलग देशों का समर्थन मिल रहा है।

यूक्रेन को समर्थन:

  • अमेरिका
  • यूरोपीय देश
  • पश्चिमी सहयोगी राष्ट्र

रूस को सहयोग:

  • चीन
  • उत्तर कोरिया
  • अन्य मित्र देश

विशेषज्ञ मानते हैं कि बाहरी समर्थन मिलने से दोनों पक्ष लंबे समय तक संघर्ष जारी रखने की स्थिति में बने हुए हैं।

फिलहाल शांति की उम्मीद क्यों कमजोर?

विश्लेषकों के अनुसार जब तक जमीन, सुरक्षा, नाटो सदस्यता और राजनीतिक नियंत्रण जैसे प्रमुख मुद्दों पर कोई समझौता नहीं होता, तब तक Russia-Ukraine War का स्थायी समाधान निकलना मुश्किल दिखाई देता है। दोनों देश अपने-अपने हितों पर अड़े हुए हैं और यही स्थिति युद्ध को लंबा खींच रही है।

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