UP News: यूपी में फर्जी मुकदमों के जरिये बेगुनाहों को जेल भेजने का खेल

भाजपा सांसद के पत्र पर कानपुर में एसआईटी गठित, संगठित गिरोह व सफेदपोश माफिया है मास्टमाइंड

Sandesh Wahak Digital Desk: विपक्ष अक्सर यूपी पुलिस के ऊपर फर्जी मुकदमे दर्ज करने का आरोप लगाता है। भले सरकार से लेकर पुलिस अफसरों की सेहत पर खास फर्क नहीं पड़ता हो।

कोर्ट भी गाहे बगाहे तमाम मामलों में फर्जी मुकदमों के आरोपी पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के आदेश देता रहता है। इस बार खुद भाजपा के सांसद ने बीते वर्षों में संगठित गिरोह द्वारा फर्जी मुकदमों को दर्ज कराने से लेकर फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर पुलिस की धनउगाही के खिलाफ मोर्चा खोला है। हालांकि फर्जी मुकदमों के मामले सामने आने पर उत्तर प्रदेश पुलिस की साख पर भी सवाल खड़ा होता है।

मिश्रिख से भाजपा सांसद अशोक कुमार रावत ने कानपुर के पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार को पत्र भेजा है। जिसमें कानपुर कमिश्नरी में फर्जी मुकदमें कराने वाले संगठित गैंग का जिक्र है। जिसने बीते आठ वर्षों में स्वार्थपूर्ति के लिए बेहिसाब फर्जी मुकदमें दर्ज कराये हैं। पत्र के मुताबिक चंद संगठित गिरोह और मददगार सफेदपोश माफिया खुलकर विरोधियों के खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज करा रहे हैं। टारगेट पर माफिया किस्म के गिरोहों द्वारा कब्जाई जा रहीं जमीनों और आपराधिक मामलों के विरोध में खड़े होने वाले लोग हैं।

फर्जी मुकदमों की समीक्षा के लिए एसआईटी का गठन

संगठित गैंग में शामिल महिलाओं द्वारा रेप और पॉक्सो एक्ट के मामले भी गंभीर धाराओं में दर्ज कराये जा रहे हैं। जिसके बाद सामान्य व्यक्ति के भी अपराधी बनते देर नहीं लगती। वहीं मुकदमों में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर धन वसूली भी इनसे की जाती है। भाजपा सांसद के पत्र के बाद पुलिस कमिश्नर ने फर्जी मुकदमों की समीक्षा के लिए एसआईटी का गठन किया है। इस फर्जीवाड़े के तार प्रदेश भर से जुड़े हैं। आरोपों के घेरे में सिपाही से लेकर जिले में बैठे पुलिस कप्तान भी हैं।

फर्रुखाबाद में पिछले साल अगस्त में बाइक मैकेनिक को गलत तरीके से जेल भेजने के मामले में एडीजी कानपुर जोन के आदेश पर मोहम्मदाबाद थाने के तत्कालीन प्रभारी मनोज भाटी समेत चार पुलिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाया गया। कौशांबी के सर्राफा व्यवसायी से लूटकांड के आरोपी विजय सोनी के एनकाउंटर मामले में भी कोर्ट ने एसओजी प्रभारी, थाना प्रभारी चरवा समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया था।

राजधानी लखनऊ में भी फर्जी मुकदमे दर्ज किये जाते हैं। तभी अप्रैल 2021 में सीबीसीआइडी ने अलीगंज थाने के तत्कालीन गल्ला मंडी चौकी इंचार्ज नैपाल सिंह, समेत चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपित पुलिसकर्मियों ने दो लोगों पर फर्जी मुकदमे लिखकर जेल भेज दिया था।

लखनऊ में बड़े अफसरों को भी फंसाता है गैंग

एपीओ के पद पर तैनात दीपक कुमार ने पिछले माह लखनऊ में महिला वकील पर केस दर्ज कराया था। आरोपों के मुताबिक उसका गैंग बड़े अफसरों को झूठे मुकदमे में फंसाकर पैसे वसूलता था। मामले का खुलासा बार काउंसिल ऑफ यूपी के विपुल खंड स्थित कैंप कार्यालय में हुई सुनवाई के बाद हुआ था।

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