Gonda News: मनरेगा में भ्रष्टाचार की शिकायत पर ग्राम प्रधान ने किया जानलेवा हमला

जिले के रूपईडीह ब्लॉक की ग्राम पंचायत बेलवा बाजार का मामला, डीएम नेहा शर्मा के आदेश पर स्थलीय जांच को पहुंची थी राजस्व टीम

Sandesh Wahak Digital Desk: गोण्डा जिले की एक ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत गांव के ही आरटीआई एक्टिविस्ट विधि छात्र प्रताप नारायण दूबे द्वारा की गयी थी, जिसकी जांच के लिए जब टीम मौके पर पहुंची तो उसके सामने ही दबंग ग्राम प्रधान व उसके परिजनों ने शिकायतकर्ता पर जानलेवा हमला कर दिया। इस मामले में भारी दबाव के बाद कौड़िया पुलिस ने प्रधान समेत दो लोगों के खिलाफ मामूली धाराओं में मुकदमा दर्ज तो कर लिया लेकिन आगे की कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। पुलिस की इस कार्यशैली से दबंगों के मनोबल बढ़े हुए हैं और पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है।

शिकायतकर्ता प्रताप नारायण दूबे

ग्राम प्रधान पर मनरेगा के कार्यों में गड़बड़ी का आरोप

जिले के रूपईडीह ब्लॉक की ग्राम पंचायत बेलवा बाजार मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों को लेकर पिछले करीब एक साल से सुर्खियों में है। इसी गांव के रहने वाले विधि छात्र व आरटीआई एक्टिविस्ट प्रताप नारायण दूबे ने मनरेगा के तहत कराए गए कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता की शिकायत की थी। पिछले दिनों गांव में हुए मिट्टी पटाई व मनरेगा कार्यों के भुगतान में गड़बड़ी की आशंका व्यक्त करते हुए प्रताप दूबे ने जिलाधिकारी नेहा शर्मा से शिकायत की थी, जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने इसकी जांच राजस्व विभाग की टीम को सौंपी थी। स्थलीय जांच के लिए राजस्व टीम 14 मई को मौके पर पहुंची। सूचना पर शिकायतकर्ता भी वहां गया।

आरोप है कि इसी दौरान शिकायत से क्षुब्ध ग्राम प्रधान उत्तम चंद्र दूबे व उसके बेटे श्रीधर ने शिकायतकर्ता पर अचानक हमला कर दिया। उसे बुरी तरह मारा-पीटा। आरोप है कि श्रीधर ने उसे दांत काटकर जख्मी कर दिया और उसके कपड़े फाड़ डाले। इस दौरान राजस्व टीम मूकदर्शक बनी रही। वहां मौजूद गांव के लोगों द्वारा बीच-बचाव कराया गया।

न्याय के लिए भटक रहा शिकायतकर्ता

दबंगों द्वारा शिकायतकर्ता की पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, इसकी पुष्टि ‘संदेश वाहक’ नहीं करता है। शिकायतकर्ता प्रताप नारायण दूबे का कहना है कि भले ही उसकी जान ले ली जाए लेकिन लोकहित के लिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध शुरू की गयी लड़ाई रूकने वाली नहीं है। यदि अभियुक्तों की तत्काल गिरफ्तारी नहीं हुई, तो मनबढ़ आरोपियों के द्वारा किए गए हिंसात्मक रवैए की संपूर्ण जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की होगी। इसके लिए न्यायालय की शरण ली जाएगी। किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

एफआईआर दर्ज करने को लिए पांच हजार, आईजी से की शिकायत

पीड़ित प्रताप नारायण दूबे ने घटना के संबंध में 16 मई को पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल को प्रार्थना पत्र दिया जिसमें आशंका जताई कि विपक्षियों द्वारा उसकी हत्या की जा सकती है। इसलिए मनबढ़ एवं दबंग आरोपियों की गिरफ्तारी आवश्यक है। इसके बाद पीड़ित ने 17 मई को देवीपाटन रेंज के आईजी अमित पाठक का दरवाजा खटखटाया और घटना के बाबत उन्हें प्रार्थना पत्र दिया जिसमें कौड़िया पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप लगाया है कि थाने पर पहुंचा तो प्रभारी निरीक्षक ने उसे ही डांटना शुरू कर दिया। फिर अपने आफिस में ले गए और कहा कि सरकारी आदमी पर ऐसे तुरंत मुकदमा नहीं लिखा जाता है।

 

आरोप है कि प्रभारी निरीक्षक ने पीड़ित से दस हजार रूपए की मांग की। उसका कहना है कि उक्त घटना थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। आरोप लगाया कि बाहर बुलाकर उससे मुकदमा लिखने व गिरफ्तारी के लिए पांच हजार रूपए ले लिए। पीड़ित प्रताप नारायण दूबे ने आईजी को बताया कि प्रभारी निरीक्षक से हुई बातचीत की आडियो रिकॉर्डिंग व घटना से संबंधित वीडियो भी उसके पास साक्ष्य के रूप में उपलब्ध है। उसने न्याय मुहैया कराने तथा प्रभारी निरीक्षक अरविंद सिंह के विरूद्ध कठोर दण्डात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

क्या कहती है कौड़िया पुलिस ?

इस संबंध में कौड़िया पुलिस का कहना है कि प्रताप नारायण दूबे द्वारा दी गई तहरीर पर उसी दिन उत्तम चंद्र व श्रीधर निवासी बेलवा बाजार के खिलाफ बीएनएस की धारा 115 (2), 352 व 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज लिया गया था। जांच की जा रही है। लगाए गए आरोप निराधार हैं।

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