Lucknow: अपोलो हॉस्पिटल्स की बड़ी उपलब्धि, 300 से ज्यादा रोबोटिक नी सर्जरी की पूरी
Sandesh Wahak Digital Desk: अपोलो हॉस्पिटल्स लखनऊ ने मेडिकल तकनीक के क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर पार करते हुए 300 से अधिक सफल रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी पूरी कर ली हैं। यह सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि अब लोग, खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाले मरीज़, बेहतर और आधुनिक इलाज को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो चुके हैं।
अब हर 5 में से 3 मरीज़ चुन रहे रोबोटिक सर्जरी
ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के चेयरमैन डॉ. संजय श्रीवास्तव के मुताबिक, अब तक का सफर बेहद उत्साहजनक रहा है। उन्होंने बताया, “पहले जहां हर पांच में से केवल एक मरीज़ रोबोटिक सर्जरी का विकल्प चुनता था, अब यह आंकड़ा बढ़कर हर पांच में से तीन मरीज़ तक पहुंच गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि AI तकनीक से लैस रोबोटिक आर्म से की गई यह सर्जरी बेहद सटीक होती है, जिससे मरीज़ को कम दर्द, कम खून बहाव, तेज़ रिकवरी और लंबा टिकाऊ परिणाम मिलता है।
गांव से शहर तक बढ़ी तकनीक की स्वीकार्यता
डॉ. श्रीवास्तव ने यह भी बताया कि अपोलो लखनऊ में आने वाले मरीज़ों में से करीब 50% मरीज शहर से बाहर, जैसे बाराबंकी, हरदोई, रायबरेली, सुल्तानपुर और फैज़ाबाद जैसे टियर-3 और टियर-4 शहरों से आते हैं। यह साफ इशारा करता है कि अब छोटे शहरों और गांवों के लोग भी आधुनिक इलाज के लिए न सिर्फ़ जागरूक हैं, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए खर्च करने को भी तैयार हैं।
100 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी अन्य विभागों में भी
अस्पताल के एमडी और सीईओ डॉ. मयंक सोमानी ने बताया कि ऑर्थोपेडिक सर्जरी के अलावा, अपोलो लखनऊ में ‘दा विंची एक्सआई’ रोबोटिक सिस्टम की मदद से यूरोलॉजी, जनरल सर्जरी, पेडियाट्रिक सर्जरी, कार्डियक सर्जरी और कैंसर सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी सफलतापूर्वक की जा रही हैं। अब तक इन विभागों में 100 से ज्यादा सफल रोबोटिक सर्जरी हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “हम दो अत्याधुनिक रोबोटिक सिस्टम्स के साथ पूरी तरह तैयार हैं कि हर मरीज़ को नई तकनीक और बेहतर इलाज मिले। आने वाले समय में हम और भी क्षेत्रों में इस तकनीक का विस्तार करेंगे।”
क्यों खास है रोबोटिक नी सर्जरी?
- सटीकता के साथ इम्प्लांट प्लेसमेंट
- जल्दी रिकवरी और कम दर्द
- खून का कम बहाव
- लंबा चलने वाला परिणाम
- मरीज़ की जीवनशैली में बेहतर सुधार
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