बिजली के निजीकरण के खिलाफ गरजी सड़कें, यूपी में एक लाख से ज्यादा बिजलीकर्मी हड़ताल पर, देशभर में दिखा असर
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में आज बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। राजधानी लखनऊ स्थित शक्ति भवन मुख्यालय पर सुबह से ही हजारों बिजलीकर्मियों का हुजूम जुट गया, जहां नारेबाजी और विरोध सभा पूरे दिन जारी रही। इस विरोध की अगुवाई नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लॉइज एंड इंजीनियर्स ने की, जिसके आह्वान पर देशभर के 27 लाख बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, संविदा कर्मी और अधिकारी एक दिन की सांकेतिक हड़ताल पर चले गए।
यूपी में सड़क पर उतरे एक लाख कर्मचारी
उत्तर प्रदेश में करीब एक लाख बिजलीकर्मी, संविदाकर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता कार्यस्थलों को छोड़ सड़कों पर उतर आए। लखनऊ में पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के फैसले के विरोध में ये कर्मचारी शक्ति भवन के बाहर जमा हुए। उनकी मांग है कि सरकार निजीकरण की यह योजना तुरंत वापस ले।
देशभर में विरोध, बड़े शहरों में दिखा असर
ये आंदोलन सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली, भोपाल, मुंबई, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, रांची, देहरादून, श्रीनगर, शिलांग और पुडुचेरी जैसे बड़े शहरों में भी बिजलीकर्मी सड़कों पर उतरे और जोरदार विरोध दर्ज कराया।
आंदोलनकारियों की चेतावनी ,निर्णय वापस लो, वरना होगी लंबी हड़ताल

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे, पावर डिप्लोमा इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष आरके त्रिवेदी, इलेक्ट्रिसिटी इंप्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव सुदीप दत्ता, इंडियन नेशनल इलेक्ट्रिसिटी वर्कर्स फेडरेशन के कुलदीप कुमार और ऑल इंडिया पावर मेन्स फेडरेशन के महासचिव समर सिन्हा ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि सरकार ने निजीकरण का फैसला नहीं बदला, तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।
किसानों और अन्य संगठनों का मिला समर्थन ![]()
भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश यादव के कहा कि आज जो शक्तिभवन पर निजीकरण के खिलाफ कार्यक्रम किया जा रहा है, किसान यूनियन अपना समर्थन दे चुकी है। देश का किसान और मजदुर एक जुट हुआ है। बिजली के निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का हो रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा आज एक साथ सड़कों पर उतरा है। अब यह लड़ाई आर पार की लड़ाई है। अब हमारा संघटन शासन में बैठे लोगो को यह अहसास करायेगा कि जो लोग वोट देना चाहते हैं, वो लोग चोट देना भाई जानते है। वही दुरी तरफ विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष के अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक करीब 27 लाख विद्युत और किसान कर्मचारी आज सड़कों पर है। अब यह आंदोलन राष्ट्रिय आंदोलन का रूप ले चूका है।
इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा, उपभोक्ता संगठनों और केंद्र व राज्य सरकार के अन्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिला। किसानों ने साफ शब्दों में कहा कि अगर बिजलीकर्मियों को दबाने की कोशिश की गई, तो वे भी आंदोलन में उतरेंगे।
सरकार से अपील ,जनता और कर्मचारियों के हित में करें फैसला
आंदोलनरत कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि वह राज्य सरकार को निजीकरण का निर्णय वापस लेने के निर्देश दे। उनका कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सेवा को मुनाफे के तराजू पर तौलना आम जनता और गरीब किसानों के साथ अन्याय है।
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