UP News: हाईकोर्ट से होम्योपैथी निदेशक डॉ. ए.के. वर्मा को बड़ी राहत, निलंबन पर लगी रोक
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश के होम्योपैथी विभाग के निदेशक डॉ. अरविंद कुमार वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके निलंबन और तबादले पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद डॉ. वर्मा को दोबारा कार्यभार मिलने की संभावना बढ़ गई है।
दरअसल डॉ. वर्मा को तबादलों से जुड़े विवाद के चलते निलंबित कर दिया गया था और निलंबन की अवधि में उन्हें राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर से संबद्ध कर दिया गया था।

16 जुलाई को हुआ था निलंबन, कार्यशैली पर उठे थे सवाल
डॉ. वर्मा के निलंबन का आदेश आयुष विभाग के प्रमुख सचिव रंजन कुमार ने 16 जुलाई की देर रात जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि डॉ. वर्मा ने अपने पद के दायित्वों का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया, भ्रामक जानकारियां दीं और उनकी कार्यशैली शिथिल तथा संवेदनहीन रही। इस कार्रवाई की जड़ें होम्योपैथी विभाग में तबादलों को लेकर हुए विवाद में हैं, जो पिछले कई महीनों से चर्चा में है।

बता दें कि मामले की शुरुआत उस वक्त हुई जब वर्ष 2024-25 के तबादलों को लेकर विभाग में हलचल तेज हो गई। होम्योपैथी विभाग में लंबे समय से कोई तबादला नहीं हुआ था। इस बार तैयार की गई तबादला सूची को आयुष राज्यमंत्री के पास भेजा गया था। सूत्रों के मुताबिक 14 और 15 जून की दोपहर तक विभिन्न संवर्गों के तबादला आदेश जारी कर दिए गए थे। लेकिन जल्द ही इन सभी आदेशों को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद से ही विभाग में अंदरूनी टकराव और असहमति की स्थिति बनी रही, जिसकी परिणति डॉ. वर्मा के निलंबन के रूप में सामने आई।

अब आगे क्या?
हाईकोर्ट द्वारा निलंबन आदेश पर अस्थायी रोक लगाए जाने के बाद अब आयुष विभाग और सरकार की अगली रणनीति पर नजरें टिकी हैं। डॉ. वर्मा के समर्थकों का कहना है कि उन्हें निशाना बनाया गया, जबकि विभागीय सूत्रों का दावा है कि तबादला प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। फिलहाल, अदालत के इस फैसले को डॉ. वर्मा के लिए राहत और विभाग में उठे विवाद के बीच एक एहम मोड़ माना जा रहा है।
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