विश्लेषकों का अनुमान, रूस-अमेरिका तनाव से बढ़ सकती हैं कच्चे तेल की कीमतें

Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका और रूस के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आ सकती है, जिससे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत जल्द ही 80 से 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान

विश्लेषकों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड ऑयल का अक्टूबर फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट, जिसका मौजूदा भाव 72.07 डॉलर प्रति बैरल था, अब 76 डॉलर तक पहुंच गया है। 2025 के अंत तक यह 80-82 डॉलर तक जा सकता है। वहीं, WTI क्रूड ऑयल की कीमत भी 69.65 डॉलर से बढ़कर 73 डॉलर तक जा सकती है, और साल के अंत तक यह 76-79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

ट्रंप का अल्टीमेटम बनी वजह

यह स्थिति तब पैदा हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस को यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए 10-12 दिन का अल्टीमेटम दिया। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर रूस उनकी बात नहीं मानता है, तो वह रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अतिरिक्त प्रतिबंध और 500% तक सेकेंडरी टैरिफ लगा सकते हैं।

इससे उन देशों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है जो रूस से रियायती दर पर कच्चा तेल खरीद रहे हैं। उन्हें अब सस्ते तेल और अमेरिका को निर्यात पर लगने वाले भारी टैरिफ के बीच संतुलन बनाना होगा। वेंचुरा सिक्योरिटीज के कमोडिटीज प्रमुख एनएस रामास्वामी के अनुसार, यह बाजार में कच्चे तेल की कमी ला सकता है और 2026 तक बाजार में सरप्लस (अधिकता) खत्म हो जाएगा।

भारत के लिए क्या हैं चुनौतियाँ

यूक्रेन युद्ध के बाद से भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बहुत बढ़ा दिया है। पहले भारत की कुल तेल खरीद में रूसी तेल का हिस्सा सिर्फ 0.2% था, जो अब बढ़कर 35 से 40% तक हो गया है, जिससे रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया है। अगर अमेरिका प्रतिबंध लगाता है, तो भारत के लिए यह एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

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