भट्टा विनियमन का ‘यूपी मॉडल’ सफल, समितियों ने वसूली रिकॉर्ड आय, पर्यावरण संरक्षण में भी अव्वल
Sandesh Wahak Digital Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश ने ईंट-भट्टा क्षेत्र के नियमन और पर्यावरण संरक्षण में दोहरी सफलता हासिल की है। ‘जिला स्तरीय सत्यापन समितियों’ के सक्रिय होने से जहाँ एक ओर राजस्व में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के मानकों के अनुपालन से प्रदूषण के ग्राफ में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान ईंट-भट्टों से विनियमन शुल्क के रूप में कुल 193.5 करोड़ रुपये की आय प्राप्त हुई है। यह आंकड़ा न केवल पिछले वर्षों के मुकाबले अधिक है, बल्कि प्रदेश के राजस्व कोष को मजबूत करने और अवैध खनन/संचालन पर अंकुश लगाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण और ‘जिग-जैग’ तकनीक
एनजीटी के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराते हुए वायु प्रदूषण कम करने के लिए कड़े कदम उठाए गए हैं। जिग-जैग तकनीक (Zig-Zag Technology) वैध भट्टों के लिए जिग-जैग तकनीक, ऊंची चिमनियों और कम प्रदूषणकारी ईंधन का उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है। सत्यापन के दौरान 80% भट्टों को एनजीटी मानकों के अनुरूप पाया गया। लखनऊ, कानपुर, आगरा, वाराणसी और दिल्ली-एनसीआर के जनपदों में ईंट-भट्टों से होने वाले वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आई है।
अवैध भट्टों पर कार्रवाई
सत्यापन समितियों की सख्ती के कारण प्रदेश में अवैध गतिविधियों पर लगाम कसी गई है। प्रदेश में अवैध ईंट-भट्टों के संचालन में 70 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। जिला अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नेतृत्व में हजारों अवैध भट्टों को बंद कराया गया और कई को मानकीकृत प्रबंधन अपनाने के लिए बाध्य किया गया।
सत्यापन समितियों का ढांचा
इन समितियों का संचालन एक समन्वित टीम द्वारा किया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:
जिलाधिकारी (DM) एवं अपर जिलाधिकारी (ADM)
उप जिलाधिकारी (SDM)
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी
स्थानीय पुलिस और पर्यावरण विशेषज्ञ
मुख्यमंत्री के इस विजन से न केवल प्रदेश को आर्थिक लाभ हुआ है, बल्कि उत्तर प्रदेश ‘सतत विकास’ (Sustainable Development) के वैश्विक लक्ष्यों की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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