Lucknow News: कबाड़ी को बेची गई प्राइमरी स्कूलों के बच्चों की किताबें, बीईओ ने की जांच

Lucknow News: लखनऊ के एक प्राथमिक स्कूल से निकलती एक तस्वीर ने शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। मोहनलालगंज इलाके के नेवाजखेड़ा प्राइमरी स्कूल से एक कबाड़ी ठेले पर किताबों से भरी बोरियाँ लेकर निकला तो गाँव के बच्चों ने उसे रोक लिया। जब बोरियाँ खोली गईं तो उसमें कक्षा एक से लेकर पाँच तक की पाठ्य पुस्तकें निकलीं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद तहलका मच गया।

बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए तुरंत जांच के आदेश दिए। जांच में हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ कि स्कूल की करीब 200 किलो किताबें महज 11 रुपए प्रति किलो के भाव से कबाड़ी को बेच दी गई थीं। कबाड़ी का बयान दर्ज किया गया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि ठेले पर लगभग छह बोरियाँ हैं, जिनका कुल वजन करीब दो क्विंटल (200 किलो) बताया जा रहा है। गाँव के लोगों ने जब इस पर आपत्ति जताई, तब मामला सामने आया।

प्रधानाध्यापक पर सवाल, बीईओ ने मांगा जवाब

इस पूरे प्रकरण के बाद मोहनलालगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुशील कनौजिया ने स्कूल के प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। उनसे पूछा गया है कि कबाड़ी को बेची गई किताबें किस सत्र की थीं और स्कूल से अन्य सामग्री क्यों निकाली जा रही थी।

मामले की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिले के नगर और ग्रामीण इलाकों के प्राथमिक स्कूलों में पढ़ने वाले लगभग 20% बच्चों के पास अभी तक पूरी किताबें नहीं हैं। शिक्षकों ने जुलाई-अगस्त में ही किताबों की मांग बीईओ कार्यालय भेजी थी, जो अभी तक पूरी नहीं हुई।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब दूसरे स्कूलों के बच्चे किताबों के लिए तरस रहे हैं, तो इस स्कूल के प्रधानाध्यापक ने अतिरिक्त किताबें उन्हें आवंटित करने के बजाय कबाड़ी के हाथों क्यों बेच दीं?

रिपोर्ट आने पर होगी कार्रवाई: बीएसए

बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि मोहनलालगंज बीईओ को पूरे मामले की गहन जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि प्रधानाध्यापक या किसी अन्य शिक्षक का दोष साबित होता है, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सरकारी स्कूलों में संसाधनों के प्रबंधन और जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।

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