25,000 करोड़ के घोटाले में दिवंगत अजित पवार और उनके परिवार को मिली क्लीन चिट
Sandesh Wahak Digital Desk: महाराष्ट्र स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक (MSCB) घोटाले के मामले में मुंबई की एक स्पेशल कोर्ट ने आज अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दाखिल सी-समरी (क्लोजर रिपोर्ट) को स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के साथ ही महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत अजित पवार, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार और भतीजे रोहित पवार पर लगे सभी आपराधिक आरोप खत्म हो गए हैं।
यह विवाद साल 2007 से 2017 के बीच का है। आरोप था कि राज्य की चीनी सहकारी समितियों और कताई मिलों को नियम ताक पर रखकर कर्ज दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को करीब 25,000 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। इस मामले में अजित पवार समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम सामने आए थे, जिसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे और अन्य एक्टिविस्ट्स ने कोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं।
जांच में नहीं मिले आपराधिक सबूत
EOW ने अपनी विस्तृत जांच के बाद अदालत को बताया कि अजित पवार और उनके परिवार के खिलाफ कोई भी आपराधिक साक्ष्य नहीं मिले हैं। बैंक और उसकी सहायक कंपनियों में जो भी अनियमितताएं थीं, वे कानूनी कार्यवाही या आपराधिक मुकदमे के दायरे में नहीं आतीं। अदालत ने अन्ना हजारे और अन्य कार्यकर्ताओं की उन आपत्तियों को भी खारिज कर दिया, जिनमें क्लोजर रिपोर्ट को चुनौती दी गई थी।
यह फैसला एक ऐसे समय पर आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता अजित पवार अब हमारे बीच नहीं हैं। इसी साल 28 जनवरी 2026 को एक दर्दनाक विमान हादसे में उनका निधन हो गया था। अजित पवार अपने चार्टर्ड प्लेन (लियरजेट 45) से मुंबई से बारामती जा रहे थे, तभी लैंडिंग के वक्त विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में उनके साथ 5 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी।
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