पाकिस्तान की बढ़ी मुसीबत, मध्यस्थता की कोशिश के बीच UAE ने मांगा अपना कर्ज वापस

Sandesh Wahak Digital Desk: पाकिस्तान इन दिनों अपनी बदहाल आर्थिक स्थिति को लेकर गहरे संकट में है। एक तरफ वह दुनिया भर से मदद की गुहार लगा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके करीबी सहयोगी देश भी अब उससे मुंह मोड़ने लगे हैं। हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान को एक बड़ा झटका देते हुए इस महीने के अंत तक 3.5 अरब डॉलर का कर्ज वापस करने की मांग की है।

पाकिस्तान ने UAE से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लिया था। यूएई ने कई बार इस कर्ज को चुकाने की अवधि बढ़ा दी थी, जिससे पाकिस्तान को थोड़ी राहत मिल रही थी। लेकिन अब, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अबू धाबी ने साफ कर दिया है कि उन्हें यह रकम इस महीने के अंत तक हर हाल में वापस चाहिए। यह खबर पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सरप्राइज है, क्योंकि वह उम्मीद कर रहा था कि यूएई एक बार फिर रोलओवर (कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ाना) कर देगा।

क्या पाकिस्तान के पास है कर्ज चुकाने का पैसा

वर्तमान में पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में 21 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की राशि है। सैद्धांतिक रूप से, इस रकम से पाकिस्तान यूएई को कर्ज चुका सकता है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कर्ज चुकाने के बाद पाकिस्तान की स्थिति क्या होगी? क्या उसके पास अपनी अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन बचेगा? आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि कर्ज चुकाने के बाद पाकिस्तान को आने वाले महीनों में बाहरी वित्तीय मदद की सख्त आवश्यकता पड़ सकती है।

कर्ज के बोझ तले दबा पाकिस्तान

पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह लगातार दुनिया भर के देशों से हाथ फैलाकर अपनी गाड़ी को आगे खींच रहा है।

आईएमएफ का कर्ज: 31 मार्च 2026 तक पाकिस्तान ने आईएमएफ से लगभग 729 करोड़ डॉलर का कर्ज ले रखा है।

विदेशी कर्ज: ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, दिसंबर 2025 की दूसरी तिमाही तक पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज लगभग 138 अरब डॉलर पहुंच गया है।

चीन और सऊदी अरब: चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा कर्जदाता है, जिसने लगभग 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। सऊदी अरब ने भी करीब 9.16 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

यूरोबॉन्ड का भुगतान: पाकिस्तान को अप्रैल 2026 में 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड का भुगतान भी करना है।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, अबू धाबी ने रकम तुरंत वापस करने की मांग की थी। एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया, “यह रकम जल्द से जल्द वापस कर दी जाएगी। वित्तीय कारणों से राष्ट्रीय गरिमा से समझौता नहीं किया जा सकता।

लेकिन सच्चाई यह है कि पाकिस्तान के पास कर्ज चुकाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यूएई के इस फैसले से पाकिस्तान के भुगतान संतुलन को स्थिर रखने के प्रयासों को बड़ा झटका लगा है। आईएमएफ प्रोग्राम के तहत रिजर्व लेवल बनाए रखने और बाहरी फंडिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान को चीन, सऊदी अरब और यूएई से लगभग 12.5 बिलियन डॉलर का रोलओवर हासिल करने की जरूरत थी। यूएई के डिपॉजिट इस व्यवस्था का एक जरूरी हिस्सा थे।

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