यूपी में महिला सुरक्षा का नया ‘मॉडल’, सड़कों पर उतर रही महिला ई-रिक्शा पायलटों की फौज
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा और स्वावलंबन को एक सूत्र में पिरोते हुए योगी सरकार ने ‘सेफ मोबिलिटी प्रोग्राम’ के जरिए एक क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी है। प्रदेश के गांवों और कस्बों में अब बेटियों को स्कूल जाने या कामकाजी महिलाओं को दफ्तर जाने के लिए असुरक्षित महसूस नहीं करना होगा, क्योंकि कमान अब महिला ई-रिक्शा पायलटों के हाथों में होगी। उत्तर प्रदेश अब महिला सुरक्षा के मामले में देश के सामने एक ‘मॉडल स्टेट’ बनकर उभर रहा है।
1000 ई-रिक्शा से मिशन की शुरुआत
योगी सरकार की इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।
- प्रथम चरण: शुरुआती दौर में समूहों की महिलाओं को 1000 ई-रिक्शा उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- सफल आगाज: अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, कौशांबी और झांसी में यह सुविधा जमीन पर उतर चुकी है।
- अगला पड़ाव: जल्द ही राजधानी लखनऊ, प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र, देवरिया, लखीमपुर खीरी और सीतापुर में भी गुलाबी ई-रिक्शा की कतारें दिखाई देंगी।
- कमाई और सम्मान: 3 लाख रुपये सालाना तक पहुंची आय
- यह योजना केवल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी भी बदल रही है।
- आर्थिक मजबूती: उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के आंकड़ों के अनुसार, इस पहल से जुड़ी महिलाओं की औसत वार्षिक आय 3 लाख रुपये से अधिक पहुंच रही है।
- प्रशिक्षण और लाइसेंस: अब तक 629 महिलाओं को ई-रिक्शा संचालन का पेशेवर प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 244 महिलाओं को ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जा चुके हैं। 119 महिलाएं पूरी तरह से उद्यमी बनकर अपना काम संभाल रही हैं।
सुरक्षित सफर, आत्मनिर्भर नारी
‘सेफ मोबिलिटी’ का सबसे बड़ा असर बेटियों की शिक्षा पर पड़ेगा। अक्सर परिवहन की असुरक्षा के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियां स्कूल छोड़ देती थीं, लेकिन महिला चालकों के आने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। यह पहल महिला सुरक्षा, सम्मानजनक परिवहन और स्वरोजगार के तीनों मोर्चों पर एक साथ प्रहार कर रही है।
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