कैबिनेट का बड़ा फैसला: सुप्रीम कोर्ट में जजों के 5 नए पद मंजूर, पेंडिंग केसों में आएगी तेजी
Sandesh Wahak Digital Desk: देश की सर्वोच्च अदालत को और अधिक सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बड़ा निर्णय लिया है। कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की कुल संख्या को वर्तमान के 34 (33 न्यायाधीश + 1 मुख्य न्यायाधीश) से बढ़ाकर 39 (38 न्यायाधीश + 1 मुख्य न्यायाधीश) करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार का मानना है कि इस कदम से न्याय प्रक्रिया में तेजी आएगी और न्यायपालिका का ढांचा और अधिक प्रभावी बनेगा।
संसद के आगामी सत्र में पेश होगा विधेयक
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के लिए संसद के आगामी सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद सुप्रीम कोर्ट के कुल जजों की संख्या (मुख्य न्यायाधीश सहित) 39 हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले साल 2019 में जजों की संख्या को 31 से बढ़ाकर 33 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) किया गया था।
क्यों पड़ी जरूरत?
लंबित मामलों का बोझ: वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 92 हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं, जिनके त्वरित निस्तारण के लिए जजों की संख्या बढ़ाना आवश्यक हो गया था।
संवैधानिक प्रावधान: संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह समय-समय पर जजों की संख्या तय कर सके।
न्यायाधीशों की संख्या का ऐतिहासिक सफर
सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम 1956 के बाद से अब तक संख्या में कई बार बदलाव हुए हैं:
1956: मूल रूप से 10 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर)
1960 से 1986: संख्या 13 से बढ़कर 25 तक पहुंची।
2009: जजों की संख्या बढ़ाकर 30 की गई।
2019: कुल 33 न्यायाधीशों का प्रावधान किया गया।
2026 (प्रस्तावित): अब कुल जजों की संख्या 38+1 करने की तैयारी है।

